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केंद्र के असहयोग के बीच झारखंड का रिकॉर्ड बजट; ₹14,000 करोड़ सिर्फ महिला सम्मान पर

रांची :  झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सोमवार को विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1,58,560 करोड़ रुपये का बजट पेश किया। यह बजट पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 9% अधिक है। सरकार ने इसे ‘अबुआ दिशोम’ (हमारा देश/राज्य) बजट का नाम दिया है, जिसका मुख्य केंद्र सामाजिक न्याय, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास है।

बजट का वित्तीय ढांचा: आंकड़ों की जुबानी

वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पिछले वर्ष (1.45 लाख करोड़) की तुलना में 9% अधिक है।

  • राजस्व व्यय: 1,20,851.90 करोड़ रुपये (वेतन, पेंशन और योजनाओं के संचालन के लिए)।
  • पूंजीगत व्यय: 37,708.10 करोड़ रुपये (पुल, सड़क, अस्पताल और बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए)। इसमें 8.5% की वृद्धि दर्ज की गई है।
  • राजकोषीय घाटा: इसे GSDP के 2.18% (13,595.96 करोड़) तक सीमित रखने का लक्ष्य है, जो बेहतर वित्तीय प्रबंधन को दर्शाता है।
  • विकास दर: राज्य की अपनी राजस्व आय 2026-27 में 66,700 करोड़ होने का अनुमान है।

प्रमुख घोषणाएं और क्षेत्रवार फोकस

1. महिला एवं सामाजिक सुरक्षा

  • मंईयां सम्मान योजना: 18-50 वर्ष की महिलाओं को अब 2,500 रुपये प्रति माह मिलेंगे। इसके लिए 14,065.57 करोड़ का विशाल प्रावधान किया गया है।
  • पेंशन: सर्वजन पेंशन योजना के लिए 3,517.23 करोड़ रुपये आवंटित।

2. कृषि और पशुपालन

  • बिरसा बीज उत्पादन योजना: इसका आवंटन 95 करोड़ से बढ़ाकर 145 करोड़ किया गया है।
  • फसल बीमा: प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए किसानों हेतु 400 करोड़ रुपये रखे गए हैं।
  • मुख्यमंत्री पशुधन विकास: इसके लिए 481.35 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है ताकि स्वरोजगार को बढ़ावा मिले।
  • पेयजल एवं सिंचाई: सौर ऊर्जा संचालित सिंचाई के लिए 75 करोड़ और जल संसाधन के लिए कुल 2,714.71 करोड़ का बजट है।

3. शिक्षा और स्वास्थ्य

  • अबुआ दवाखाना: राज्य भर में 750 नए ‘अबुआ दवाखाना’ खोले जाएंगे ताकि गांवों तक इलाज पहुंच सके।
  • कैंसर केयर: कैंसर के महंगे इलाज के लिए 200 करोड़ की विशेष योजना प्रस्तावित है।
  • शिक्षा का उन्नयन: 80 उत्कृष्ट विद्यालय (Schools of Excellence) और 325 लीडर स्कूलों के संचालन के लिए 16,251.43 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

4. ऊर्जा और बुनियादी ढांचा

  • मुफ्त बिजली: 200 यूनिट मुफ्त बिजली योजना जारी रहेगी।
  • सड़कें: पथ निर्माण विभाग को 6,601.28 करोड़ रुपये मिले हैं।

5. ‘अबुआ आवास’ और ग्रामीण विकास

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार ने आवास और रोजगार पर जोर दिया है:

  • अबुआ आवास योजना: 6.33 लाख आवासों के लक्ष्य के साथ 4,100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
  • मनरेगा: राज्य में 10 करोड़ से अधिक मानव-दिवस सृजित करने का लक्ष्य है।
  • पलाश ब्रांड: सखी मंडलों द्वारा निर्मित उत्पादों को बाजार देने के लिए ‘पलाश’ ब्रांड को 66 करोड़ रुपये दिए गए हैं।

पेसा कानून और वैश्विक पहचान

  • ग्राम सभा सशक्तिकरण: वित्त मंत्री ने बताया कि 2 जनवरी 2026 से राज्य में ‘पेसा कानून’ लागू हो गया है, जिससे ग्राम सभाओं को बालू घाट और हाट-बाजार प्रबंधन जैसे अधिकार मिले हैं।
  • दावोस में उपस्थिति: झारखंड ने पहली बार वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) में हिस्सा लेकर वैश्विक मंच पर निवेश गंतव्य के रूप में अपनी पहचान बनाई है।

वित्त मंत्री ने बजट भाषण के दौरान केंद्र सरकार पर असहयोग का आरोप लगाया।

  • उन्होंने कहा कि केंद्र से लगभग 16,000 करोड़ रुपये (टैक्स शेयर और अनुदान) कम मिले हैं।
  • कोयला कंपनियों पर 1.36 लाख करोड़ का बकाया राज्य को नहीं मिल रहा है।
  • मंत्री के अनुसार, आर्थिक बाधाओं के बावजूद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य के खजाने से विकास कार्यों और वेतनों को रुकने नहीं दिया।

यह बजट स्पष्ट रूप से आगामी चुनावों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। जहाँ एक ओर भारी सब्सिडी और सम्मान राशि के जरिए ‘वोट बैंक’ को साधने की कोशिश है, वहीं बुनियादी ढांचे पर 8.5% की वृद्धि राज्य के दीर्घकालिक विकास का संकेत देती है। 2026-27 का यह बजट झारखंड सरकार की ‘कल्याणकारी’ छवि को और मजबूत करता है। इसमें मध्यम वर्ग के लिए मुफ्त बिजली (200 यूनिट), महिलाओं के लिए नकदी हस्तांतरण और आदिवासियों के लिए पेसा जैसे संवैधानिक अधिकारों का संतुलन बनाने की कोशिश की गई है। इस बजट के माध्यम से सरकार ने न केवल लोक-लुभावन योजनाओं पर ध्यान केंद्रित किया है, बल्कि बुनियादी ढांचे के विकास के लिए भी एक मजबूत रोडमैप पेश किया है।

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