तिरुअनंतपुरम : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने एक बार फिर अपने बयानों से देश के सियासी पारे को चढ़ा दिया है। ब्राह्मणवाद, जनेऊ और हिंदुत्व को लेकर दी गई उनकी ताजा दलीलों ने न केवल भाजपा को हमलावर होने का मौका दिया है, बल्कि अपनी ही पार्टी के लिए असहज स्थिति पैदा कर दी है।

अय्यर ने अपनी धार्मिक पहचान को लेकर बेहद निजी और बेबाक टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि मेरा जन्म ब्राह्मण परिवार में हुआ, लेकिन मैंने कभी ‘जनेऊ’ धारण नहीं किया। अय्यर के अनुसार, वयस्क होने के बाद उन्होंने कभी ‘संध्यावंदन’ जैसी पूजा-पद्धति नहीं अपनाई। उन्होंने बताया कि बचपन का समय आश्रम में बिताने के कारण वे हिंदू प्रथाओं के ‘आलोचक’ बने, हालांकि वे दर्शन के विरोधी नहीं हैं।

अय्यर ने हिंदू धर्म और हिंदुत्व के बीच एक लंबी लकीर खींचते हुए स्पष्ट किया और कहा कि वे हिंदुत्व को एक महान धर्म के ‘दुरुपयोग’ और उसकी ‘विकृति’ के रूप में देखते हैं। उन्होंने खुद पर लग रहे ब्राह्मणवादी आरोपों को यह कहकर खारिज किया कि यह पिनराई विजयन पर भाजपाई होने के आरोप जैसा बेतुका है।

अय्यर ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक बयान पर दिलचस्प प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि योगी की केवल एक बात से वे सहमत हैं— वह है दिल्ली का प्रदूषण। अय्यर ने तंज कसते हुए कहा, “आश्चर्य है कि दिल्ली में रहते हुए मेरे फेफड़े अभी भी काम कर रहे हैं।”

“यूपी में रहना है तो योगी-योगी कहना है”, उन्होंने इस मशहूर नारे का जिक्र करते हुए स्पष्ट किया कि वे इसे राजनीतिक संदर्भ में नहीं, बल्कि ‘मौसम और आबोहवा’ के संदर्भ में कह रहे हैं।

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