लखनऊ : 2027 के विधानसभा चुनाव में जीत सुनिश्चित करने के लिए भाजपा ने एक व्यापक और बहुस्तरीय सर्वेक्षण योजना तैयार की है। पार्टी ने तय किया है कि प्रत्याशियों का चयन पूरी तरह से ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ पर आधारित होगा, न कि किसी सिफारिश पर।
निष्पक्षता बनाए रखने के लिए भाजपा दो अलग-अलग एजेंसियों से सर्वे करा रही है। दोनों कंपनियों की रिपोर्ट का मिलान किया जाएगा ताकि किसी भी प्रकार के पक्षपात या गलती की गुंजाइश न रहे। फरवरी के दूसरे या तीसरे हफ्ते से दूसरे चरण का सर्वे शुरू होगा। सर्वे सिर्फ भाजपा की 258 सीटों पर ही नहीं, बल्कि रालोद, सुभासपा, अपना दल (एस) और निषाद पार्टी जैसे सहयोगियों के प्रभाव वाली सीटों पर भी होगा।
जनता का मन टटोलने के इस काम में सर्वेक्षण एजेंसियां केवल पार्टी कार्यकर्ताओं तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि उनका दायरा काफी व्यापक होगा। सर्वेयर सार्वजनिक स्थानों पर आम लोगों से मुद्दों पर बात करेंगे। दुकानदार, वकील, डॉक्टर, शिक्षक, महिलाएं और युवाओं से सीधे संवाद किया जाएगा। आरएसएस कार्यकर्ताओं और भाजपा के मंडल/जिला स्तर के पदाधिकारियों से भी राय ली जाएगी।
सर्वेक्षण में मुख्य रूप से इन सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे कि क्या विधायक सुलभ हैं और जनता की समस्याओं को सुनते हैं? पिछले 4 वर्षों में क्षेत्र में कितना वास्तविक काम हुआ है? विधायक की अपनी जाति और अन्य समुदायों के बीच कितनी पकड़ है? क्या विधायक पर भ्रष्टाचार या किसी बड़े विवाद का दाग है? और अंततः यह कि यदि आज चुनाव हों, तो क्या मौजूदा विधायक दोबारा जीत सकते हैं? यदि नहीं, तो बेहतर विकल्प कौन है?
2022 के चुनाव में भी भाजपा ने इसी तरह के कड़े सर्वे के आधार पर लगभग 120 विधायकों के टिकट काट दिए थे। इस बार भी संकेत स्पष्ट हैं ‘काम नहीं तो टिकट नहीं’।