
पूर्णिया : ज्योतिष पीठ के प्रमुख शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ प्रयागराज की पॉक्सो कोर्ट द्वारा प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश ने देश की राजनीति में उबाल ला दिया है। इस विवाद में अब पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव की एंट्री हुई है, जिन्होंने भाजपा सरकार पर तीखा हमला करते हुए इसे “सनातनी संतों को दबाने की साजिश” करार दिया है।
सांसद पप्पू यादव ने सोशल मीडिया के माध्यम से केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार को निशाने पर लिया। पप्पू यादव ने कहा कि शंकराचार्य लगातार सरकार से कड़े सवाल पूछ रहे थे, जिससे भाजपा बेचैन है। उनका मुंह बंद करने के लिए एक “कुख्यात” के जरिए झूठा मुकदमा दर्ज कराया गया है। उन्होंने बेहद तीखे अंदाज में कहा है कि भाजपा को आसाराम और राम रहीम जैसे लोग प्रिय हैं, लेकिन जब कोई असली सनातनी संत मर्यादा और नीति पर सवाल उठाता है, तो वह उनके लिए “अप्रिय” हो जाता है।
यह कानूनी विवाद तब शुरू हुआ जब प्रयागराज की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में एक याचिका दायर की गई। तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने यह मामला कोर्ट में उठाया है। आरोप है कि माघ मेले के दौरान शंकराचार्य के शिविर और गुरुकुल में नाबालिग बच्चों का यौन शोषण किया गया। याचिका में कहा गया है कि दो नाबालिग पीड़ितों ने स्वयं आशुतोष महाराज को अपनी आपबीती सुनाई, जिसके बाद उन्होंने कोर्ट से निष्पक्ष जांच और FIR की मांग की।
यह मामला केवल कानूनी नहीं रह गया है, बल्कि यह सनातन धर्म के दो बड़े संप्रदायों के बीच के तनाव को भी दर्शाता है। एक पक्ष ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य के खेमे की ओर से लगाए गए तो दूसरा पक्ष शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थकों का है जिनका दावा है कि यह उनकी छवि धूमिल करने और उन्हें राजनीतिक रूप से घेरने का प्रयास है।
इस पर सांसद पप्पू यादव ने कहा है कि यह संतों को डराने और उनकी आवाज दबाने की सरकारी साजिश है और इस तरह से भाजपा ने अपनी कब्र खोद ली है।
प्रयागराज कोर्ट के इस आदेश ने न केवल धार्मिक जगत बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी ध्रुवीकरण तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने के आसार हैं।