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रांची : रांची में ईडी के क्षेत्रीय कार्यालय में रांची पुलिस का जाना और फर्जी तरीके से किए गए मुकदमे को लेकर ईडी अधिकारियों को परेशान करना भारत के संवैधानिक ढांचे पर प्रहार है। उक्त बातें रक्षा राज्य मंत्री श्री संजय सेठ ने एक बयान में कही।

रांची पुलिस की यह कार्रवाई जांच एजेंसियों के स्वतंत्र एवं निष्पक्ष कार्य में बाधा डालने का कुत्सित प्रयास है। ऐसा करके झारखंड का शासन झारखंड को बंगाल बनाने पर आमादा है। किसी भी कीमत पर झारखंड को बंगाल नहीं बनने देंगे। ये बातें कहते हुए श्री सेठ ने कहा कि झारखंड में पेयजल एवं स्वच्छता, जमीन घोटाले, खनन घोटाला सहित कई भ्रष्टाचार की जांच ईडी कर रही है। पेयजल एवं स्वच्छता के तहत जल जीवन मिशन को फेल करने के लिए बड़ी साजिश की गई है। ऐसी सूचना मिली है कि भ्रष्टाचार के आरोपी द्वारा ईडी पर मुकदमा दर्ज किया गया है।

 जांच एजेंसियों का काम भ्रष्टाचार की जांच और दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित करना है। यह कार्य यदि झारखंड पुलिस ने की होती तो केंद्रीय एजेंसी को झारखंड में भ्रष्टाचार पर कार्रवाई की जरूरत ही नहीं पड़ती। यदि तब भी झारखंड की शासन व्यवस्था को ईडी पर विश्वास नहीं है तो तत्काल राज्य सरकार सभी भ्रष्टाचार की सीबीआई जांच की अनुशंसा करे। लेकिन सरकार यह नहीं करेगी क्योंकि राज्य में व्यापक पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है और हो रहा है।   

श्री सेठ ने कहा कि लेकिन जब झारखंड की पूरी शासन व्यवस्था भ्रष्टाचारियों के संरक्षण में लगी है और ईडी कार्यालय को पुलिस द्वारा घेरना उसी की एक कड़ी है। इससे पूर्व भी जेल में बैठे भ्रष्टाचारियों द्वारा ईडी पर हमले की योजना का खुलासा हो चुका है। ऐसी स्थिति में राज्य की शासन व्यवस्था का भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देना बहुत ही गलत है। इस बात की भी आशंका से इंकार नहीं नहीं किया जा सकता कि ईडी कार्यालय का घेराव कर भ्रष्टाचार के साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ या उन्हें नष्ट भी किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि झारखंड में ईडी भी जब सुरक्षित नहीं है तो समझा जा सकता है कि भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई कैसे होगी और उसके बाद भी उक्त व्यक्ति ने ईडी पर ही मुकदमा दर्ज किया है जबकि ईडी ने किसी भी व्यक्ति को पूछताछ के लिए अपने कार्यालय बुलाया भी नहीं।

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