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टी–सीरीज कंपनी के मालिक की हत्या के मामले मे सजा काट रहे मोहम्मद रऊफ दाउद मर्चेन्ट की जेल में ही हार्ट अटैक से शनिवार 9 जनवरी 26 को मौत हो गई।

सभी लोक भाषाओं से लेकर नए कलाकारों को प्रश्रय और बढ़ावा देने वाले मा वैष्णो देवी के अनन्य भक्त गुलशन कुमार की मुंबई के अंधेरी स्थित एक मंदिर के बाहर तीन लोगों ने 12 अगस्त 1997 को गोली मारकर हत्या कर दी थी। कहा जाता है कि 16 राउंड गोलियां चलाई गई थी।

तब रऊफ को सेशन कोर्ट ने ही उम्र कैद की सजा सुना दी थी जिसे बाद में हाई कोर्ट ने भी बरकरार रखा था। डॉन अबू सलेम द्वारा 5 लाख की वसूली मांगने और गुलशन कुमार द्वारा नहीं दिए जाने के बाद अबू सलेम ने शूटर राजा को इसकी सुपारी दी थी और दिन- दहाड़े हत्या करवा दी थी।

इस केस में संगीतकार नदीम श्रवण फ़ेम नदीम का नाम भी आया था। हालांकि मामले में नाम आने के बाद वे ईंगलैंड चले गए थे और उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं होने के कारण 2002 में उन्हें बरी कर दिया गया था। लेकिन तब तक उनका कैरियर बर्बाद हो चुका था।

गुलशन कुमार जो अपनी पढ़ाई के बाद अपने पिता की जूस की दुकान संभालने लगे थे, ने बाद में कैसेट्स और रिकार्ड्स की दुकान खोल ली और बाद में कैसेट्स इंडस्ट्रीज भी। टी-सीरीज नाम से उनकी कैसेट्स कंपनी पहले भजनों और भक्ति संगीत से शुरू होकर, लोक गीतों और फिल्मों तक जा पहुंची। उन्होंने लगभग 15 फिल्मों का निर्माण किया और पूरे फिल्म इंडस्ट्रीज छा गए। लेकिन उनके चाहने वालों की दुआ बहुत दिनों तक काम नहीं आ सकी और एक दिन मुंबई के एक मंदिर के बाहर ही हत्यारों ने उनकी जान ले ली।

और अंततः अब लगभग 26 साल बाद महाराष्ट्र के क्षत्रपति संभाजीनगर स्थित हरसुल जेल में 2002 से सजा काट रहे उनके हत्यारे 60 वर्षीय मोहम्मद रऊफ दाउद मर्चेन्ट की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई।

जेल अधिकारी बता रहे हैं कि आठ जनवरी को जेल की बैरक में नमाज़ पढ़ते हुए उसके सीने में तेज दर्द हुआ जिसके बाद उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम में उसकी मौत का कारण गंभीर दिल का दौरा बताया गया है। बाद में उसके परिजन उसका शव ले गए और अंतिम संस्कार किया।    

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