भारतीय कृषि के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि
नई दिल्ली : चावल उत्पादन में चीन से भी आगे निकाल जाने से भारतीय किसानों ही नहीं बल्कि पूरे देश का मान बढ़ा है और यह सब के लिए गर्व की बात है। इसे इस तरह भी देखा जा रहा है कि भारत ने कहीं तो चीन को पटखनी दी है। भारत पहले से ही दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक देश रहा है, और अब उत्पादन में भी शीर्ष स्थान हासिल कर लेने से उसकी वैश्विक पकड़ और मजबूत हुई है। एशिया, अफ्रीका और मध्य-पूर्व के कई देशों में भारतीय चावल की भारी मांग बनी हुई है।
भारत ने कृषि क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए चीन को पीछे छोड़कर दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश बनने का गौरव हासिल कर लिया है। आधिकारिक सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत का कुल चावल उत्पादन अब 150 मिलियन टन से अधिक पहुंच गया है, जबकि चीन का उत्पादन इससे कम रहा है। भारत का चावल उत्पादन बढ़कर 15.18 करोड़ टन के स्तर पर पहुंच गया है, जो चीन के 14.5 करोड़ टन की तुलना में अधिक है। यह उपलब्धि भारतीय किसानों की मेहनत, आधुनिक कृषि तकनीकों और सरकार की नीतिगत सहायता का प्रत्यक्ष परिणाम मानी जा रही है।
इस संबंध में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत अब न केवल अपनी घरेलू जरूरतें पूरी कर रहा है, बल्कि वैश्विक खाद्य सुरक्षा में भी अहम भूमिका निभा रहा है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अनुसार, खरीफ और रबी दोनों मौसमों में बेहतर मानसून, उन्नत बीजों और वैज्ञानिक खेती के कारण चावल उत्पादन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। सरकार द्वारा हाल के वर्षों में उच्च उपज देने वाली चावल की किस्में, सूक्ष्म सिंचाई, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, डिजिटल कृषि और फसल बीमा जैसी योजनाओं ने किसानों की उत्पादकता बढ़ाई है। वैज्ञानिक अनुसंधान के तहत विकसित नई किस्मों से कम पानी में अधिक उत्पादन संभव हुआ है, जिससे लागत घटी और लाभ बढ़ा है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि चावल उत्पादन में यह बढ़त ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगी, कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देगी और रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी। साथ ही, खाद्य पदार्थों की उपलब्धता बढ़ने से महंगाई पर भी नियंत्रण रहने की संभावना है।