रांची: पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने झारखंड में डीजीपी की नियुक्ति पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि इससे यह संदेश गया है कि मुख्यमंत्री के लिए नियम, कानून, संविधान और न्यायालय की कोई अहमियत नहीं रह गई है। उन्होंने मुख्यमंत्री को उनके फैसले के लिए “बधाई” दी और कहा कि इस निर्णय ने यह साबित कर दिया है कि सरकार संवैधानिक मर्यादाओं को कितना नजरअंदाज कर रही है।
उन्होंने आगे यह भी कहा कि अगर मुख्यमंत्री इतिहास में जंगल राज चलाने वालों की सूची में सबसे ऊपर आना चाहते हैं, तो उन्हें अपने फैसलों में और भी खुलापन दिखाना चाहिए और उन्हें झामुमो के केन्द्रीय सचिव सुप्रियो भट्टाचार्य को ही डीजीपी बना देना चाहिए था। यह बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। मरांडी ने कहा कि कानून और न्यायपालिका की अनदेखी भले ही की जाए, लेकिन ईश्वर से डरना जरूरी है, क्योंकि न्याय देर से सही, लेकिन होता जरूर है। इसके साथ ही मरांडी ने यह भी कहा कि ईश्वर की लाठी की आवाज भले ही सुनाई न दे, लेकिन उसका असर गहरा होता है।
पूर्व मुख्यमंत्री के इस बयान और तिलमिलाहट को सत्ता में बैठे लोग और सियासी लोग अपनी अपनी तरह से देख रहे हैं।