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धनबाद :  बुधवार को धनबाद का ऐतिहासिक गोल्फ ग्राउंड झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के 54वें स्थापना दिवस का साक्षी बना। इस अवसर पर आयोजित विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री और झामुमो के केंद्रीय अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने राज्य की अस्मिता, शिक्षा और सामाजिक एकजुटता पर ज़ोर दिया।

मुख्यमंत्री ने दिशोम गुरु शिबू सोरेन को याद करते हुए कहा कि यह दिन केवल स्थापना दिवस नहीं, बल्कि गुरुजी के संकल्पों को दोहराने का दिन है। उन्होंने गुरुजी को आदिवासी, दलित और पिछड़ों का विश्वस्तरीय नेता बताया।

हेमंत सोरेन ने अभिभावकों से अपील की कि बच्चों की पढ़ाई में कोई कटौती न करें। उन्होंने कहा, “समाज की मजबूती शिक्षा से ही संभव है।” सरकार इसके लिए नि:शुल्क कोचिंग और अन्य कल्याणकारी योजनाएं चला रही है।

उन्होंने याद दिलाया कि 4 फरवरी 1973 को इसी धरती से झारखंड आंदोलन की नींव रखी गई थी। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि झामुमो ने सत्ता छीनकर यह साबित किया कि झारखंडी अपना राज्य खुद बेहतर चला सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने एक बड़ा संदेश देते हुए कहा कि झामुमो अब सभी को साथ लेकर चलने वाली पार्टी है। उन्होंने कहा कि जो लोग बाहर से आकर यहां बस गए हैं और इस मिट्टी से जुड़ गए हैं, वे भी गर्व से खुद को झारखंडी कहें। क्योंकि “जन्म देने वाली मां से बढ़कर पालन-पोषण करने वाली मां होती है, और यही झारखंड की भावना है।”

इस ऐतिहासिक सभा में कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए, जिनमें लखी सोरेन, मन्नु आलम, रमेश टुडू, मुकेश सिंह, मुकीम अंसारी, एजाज अहमद, सुखलाल मरांडी, रतिलाल टुडू, चंद्रशेखर अग्रवाल, अजय रवानी, मंसाराम मुर्मू, लक्ष्मी मुर्मू आदि प्रमुख हैं।

  झारखंडी अस्मिता की गूंज अब सात समंदर पार: मुख्यमंत्री ने कहा- ‘लंदन में भी गूंज रहा है जोहार’

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड की माटी और यहां की संस्कृति के बढ़ते वैश्विक प्रभाव पर गर्व व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि ‘जोहार’ अब केवल एक अभिवादन नहीं, बल्कि झारखंडी पहचान का अंतरराष्ट्रीय प्रतीक बन चुका है। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में एक महत्वपूर्ण बात साझा की। उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए गर्व का विषय है कि आज लंदन जैसे बड़े विदेशी शहरों में भी लोग ‘जोहार’ के महत्व को समझ रहे हैं और इसे अपना रहे हैं। देश के कोने-कोने में इस शब्द को जो सम्मान मिल रहा है, वह हर झारखंडी की जीत है। पार्टी की मजबूती पर जोर देते हुए सोरेन ने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) एक संगठन मात्र नहीं, बल्कि एक परिवार है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को भरोसा दिलाया कि हर मौसम, हर विषम परिस्थिति और हर राजनीतिक चुनौती में पार्टी उनके पीछे चट्टान की तरह खड़ी है। ऐतिहासिक गोल्फ ग्राउंड की धरती से मुख्यमंत्री ने राज्य के पुरोधाओं के त्याग को याद किया। उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा, तिलका मांझी, बिनोद बिहारी महतो और ए.के. राय जैसे महापुरुषों का जिक्र करते हुए कहा कि इनकी वीरता ने ही दमनकारियों के घुटने टिका दिए थे। मुख्यमंत्री ने कटाक्ष करते हुए कहा कि झारखंड के संसाधनों ने पूरे देश की अर्थव्यवस्था को गति दी, लेकिन बदले में यहां के मूलवासियों को केवल शोषण, अशिक्षा और गरीबी मिली। इसी अन्याय को खत्म करने के लिए दिशोम गुरु ने अलग राज्य के आंदोलन की मशाल जलाई थी।  

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