
चुनाव आयोग ने तीसरे चरण में 22 राज्यों में SIR शुरू करने का दिया आदेश
रांची : भारत निर्वाचन आयोग ने देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। झारखंड सहित देश के 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) यानी विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। चुनाव आयोग के सचिव पवन दीवान ने सभी संबंधित मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को पत्र लिखकर इसकी तैयारियां युद्ध स्तर पर पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
देश में अंतिम बार 1951 से 2004 के कालखंड के लिए SIR हुआ था। पिछले 21 वर्षों से यह प्रक्रिया लंबित थी, जिस कारण मतदाता सूची में कई विसंगतियां आ गई हैं। अब अप्रैल 2026 से शुरू होने वाले इस अभियान के जरिए सूची को पूरी तरह ‘अपडेट’ किया जाएगा।
- पहला चरण: बिहार में सफलतापूर्वक संपन्न हो चुका है।
- दूसरा चरण: 28 अक्टूबर 2025 से 12 राज्यों में वर्तमान में जारी है।
- तीसरा चरण: झारखंड सहित शेष 22 राज्यों में अप्रैल से शुरू होगा।
अभियान के दौरान बूथ लेवल अधिकारी (BLO) और बूथ लेवल एजेंट (BLA) सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
- डोर-टू-डोर सर्वे: अधिकारी मतदाताओं से मिलकर विशेष फॉर्म भरवाएंगे।
- दोहरी एंट्री का खात्मा: यदि किसी मतदाता का नाम दो अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों या राज्यों की सूची में है, तो उसे एक जगह से हटाना अनिवार्य होगा।
- नया पंजीकरण: जो योग्य नागरिक अब तक मतदाता नहीं बने हैं, उनसे दस्तावेज लेकर उनका नाम सूची में जोड़ा जाएगा।
मतदाता सूची में नाम जुड़वाने या सुधार के लिए निम्नलिखित में से किसी भी एक दस्तावेज की आवश्यकता होगी:
- आधार कार्ड, पैन कार्ड या पासपोर्ट।
- 10वीं की मार्कशीट या जन्म प्रमाणपत्र।
- सरकारी पहचान पत्र, जाति प्रमाणपत्र या निवास प्रमाण।
- NRC में नाम, परिवार रजिस्टर की नकल या भूमि आवंटन पत्र।
इस प्रक्रिया का प्राथमिक लक्ष्य मतदाता सूची से अशुद्धियों को पूरी तरह साफ करना है। इसके अतिरिक्त जो लोग पलायन कर चुके हैं, उनका नाम वर्तमान निवास स्थान पर शिफ्ट करना, मृत व्यक्तियों के नाम सूची से हटाना ताकि फर्जी मतदान की गुंजाइश न रहे, विदेशी नागरिकों के नाम सूची से हटाना और हर योग्य भारतीय नागरिक का नाम शामिल करना इसका मुख्य उद्देश्य है।