पटना : बिहार की राजनीति के गलियारे में इन दिनों तेज प्रताप यादव के बदले हुए सुर सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बने हुए हैं। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे, जो कभी भाजपा और पीएम मोदी के कट्टर आलोचक हुआ करते थे, अब उनके मुरीद नजर आ रहे हैं। उनके बयानों में अब विरोध की जगह ‘नंबर’ और ‘तारीफ’ ने ले ली है।
तेज प्रताप यादव ने न केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली की सराहना की, बल्कि उन्हें 10 में से 10 नंबर भी दे डाले। इसके पीछे उन्होंने एक दिलचस्प तर्क दिया है। तेज प्रताप के अनुसार, पीएम मोदी पूजा-पाठ बहुत करते हैं और चूंकि वह खुद भी धार्मिक हैं, इसलिए वह उन्हें पूरे अंक देंगे। अगर वे धार्मिक नहीं होते तो नंबर काट भी सकते थे।
उन्होंने मजाकिया लहजे में यह भी कहा कि मोदी जी उनके पिता (लालू यादव) के ‘राजनीतिक स्कूल’ से निकले हैं, इसलिए वह ठीक ही होंगे।
समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव, जो लालू परिवार के करीबी और रिश्तेदार भी हैं, अब तेज प्रताप के निशाने पर हैं। धीरेंद्र शास्त्री की आलोचना करने पर तेज प्रताप ने अखिलेश यादव को आड़े हाथों लिया और उनकी संपत्ति व संसाधनों पर सवाल उठाते हुए ‘हिसाब’ मांग लिया। उन्होंने साफ किया कि जो समाज को जोड़ने का काम करेगा, वह उसके साथ हैं और अगर बाबा धीरेंद्र शास्त्री बुलाएंगे, तो वह उनकी अगली पदयात्रा में भी शामिल होंगे।
तेज प्रताप के ‘गुड बुक’ में अब केवल नीतीश कुमार ही नहीं, बल्कि सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा जैसे भाजपा के कद्दावर नेता भी शामिल हो गए हैं। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ करके उन्होंने यह संकेत दे दिया है कि वह अब विचारधारा की बंदिशों से ऊपर उठकर अपनी एक स्वतंत्र छवि गढ़ रहे हैं।
तेज प्रताप के इस हृदय परिवर्तन के केंद्र में राजद के भीतर की गुटबाजी भी नजर आती है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि अब उनका रास्ता अलग है और वह बड़े भाई होने के नाते सिर्फ तेजस्वी को आशीर्वाद दे सकते हैं। राजद की चुनावी हार या कम सीटों के लिए उन्होंने तेजस्वी के आस-पास रहने वाले लोगों को जिम्मेदार ठहराया, जिन्हें वे अक्सर ‘जयचंद‘ कहकर संबोधित करते हैं।