धनबाद : धनबाद पुलिस अब अपराधियों का केवाईसी अर्थात ‘नो योर कस्टमर’ करने में लगी है। इससे होगा ये कि आपका खाता अगर वहां खुल गया है तो आपकी पहचान भी डिजिटली हो सकेगी। इसमें सभी गिरफ्तार आरोपितों का बायोमीट्रिक डेटा अपडेट करने के बाद ही उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा जा रहा है। जिसका सीधा लाभ यह होगा कि अपराधियों की पहचान अब पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज, सटीक और भरोसेमंद तरीके से हो सकेगी।
यह व्यवस्था पुराने एसएसपी कार्यालय के नीचे स्थित एनएएफआइएस कार्यालय में संचालित की जा रही है, जिसके तहत एक साल में छह हजार से अधिक अपराधियों का डेटा अपडेट हो चुका है। इस अपडेट में छह हजार से अधिक अपराधियों का बायोमीट्रिक और आपराधिक रिकॉर्ड शामिल है। इन सभी अपराधियों का विवरण एनसीआरबी नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा है। इसमें ऑनलाइन के साथ-साथ ऑफलाइन मोड में भी फिंगरप्रिंट, आंख की पुतली और अन्य जरूरी जानकारियां सुरक्षित रखी जा रही हैं। धनबाद पुलिस के अनुसार यह पूरी प्रणाली राष्ट्रीय स्तर पर एकीकृत है इसके तहत सिर्फ धनबाद ही नहीं, बल्कि देश के किसी भी कोने में अगर किसी अपराध स्थल से फिंगरप्रिंट या बायोमीट्रिक साक्ष्य मिलता है, तो संबंधित अपराधी की पहचान कुछ ही समय में हो सकेगी।
केवल नये गिरफ्तार आरोपितों का ही नहीं, बल्कि धनबाद जेल में बंद कैदियों का भी बायोमीट्रिक डेटा एनएएफआइएस के तहत तैयार किया गया है। पुलिस ने बताया कि पिछले वर्ष यह अभियान जेलों तक चलाया गया, ताकि पुराने अपराधियों का भी डिजिटल रिकॉर्ड राष्ट्रीय डेटाबेस से जोड़ा जा सके। इस क्रम में थानों और जेलों में आधुनिक फिंगरप्रिंट स्कैनर लग रहे हैं और कुछ जगह तो लगाए भी जा चुके हैं।
धनबाद पुलिस ने सभी थानों और ओपी को निर्देश दिया है कि हर गिरफ्तार आरोपी और जेल में बंद व्यक्ति का बायोमीट्रिक डेटा लिया जाए। इसके लिए थानों और जेलों में भी आधुनिक फिंगरप्रिंट स्कैनर लगाने के साथ पुलिसकर्मियों को तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया गया है, ताकि डेटा संग्रह और अपलोडिंग हर जगह संभव हो सके।
पुलिस की परेशानी जिसमें नाम बदलकर अपराध करने वाले और एक जिले में अपराध कर दूसरे जिले या राज्य में जाकर छिप जाने वाले अपराधी शामिल हैं, पर भी इससे रोक लगाई जा सकेगी। कई मामलों में आरोपी नाम बदलकर या फर्जी पहचान के सहारे पुलिस को लंबे समय तक चकमा देने की कोशिश करते रहते हैं। इसी तरह के एक मामले में वर्ष 2023 में धनबाद जेल में बंद गैंगस्टर अमन सिंह की गोली मारकर हत्या के मामले में हत्या का आरोप सुंदर महतो पर लगा था, जबकि बाद में जांच से खुलासा हुआ कि वह व्यक्ति सुंदर महतो नहीं, बल्कि यूपी निवासी रितेश यादव था।
एनएएफआइएस और एनसीआरबी पोर्टल से जुड़ने के बाद यदि देश के किसी भी कोने में अपराध होता है और वहां आरोपी का फिंगरप्रिंट लिया जाता है, तो सिस्टम तुरंत उसके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड को सामने ला देगा। इससे यह स्पष्ट हो जायेगा कि आरोपी पहले किन-किन मामलों में शामिल रहा है, किस जिले या राज्य का रहने वाला है और उसका आपराधिक रिकार्ड क्या है और नेटवर्क कितना फैला हुआ है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इससे सीरियल अपराधियों, पेशेवर गैंग और फरार बदमाशों पर शिकंजा कसना काफी आसान हो जायेगा।
धनबाद जिला पुलिस के अनुसार, विभिन्न थाना-ओपी से 1799 आरोपितों को जेल भेजा गया, जिनका बायोमीट्रिक डेटा तैयार किया गया। वर्ष 2025 में जनवरी से नवंबर तक धनबाद जिले में कुल 5918 आपराधिक मामले दर्ज किये गये हैं इनमें 58 हत्या, 5 डकैती, 206 घर में चोरी, 102 अपहरण समेत अन्य धाराओं के मामले शामिल हैं।
इस संबंध में एसएसपी, धनबाद प्रभात कुमार का कहना है कि इससे अपराध नियंत्रण में उल्लेखनीय सुधार होगा। धनबाद पुलिस लगातार अपराधियों का डिजिटल डेटाबेस तैयार कर रही है, जिसे एनसीआरबी पोर्टल से जोड़ा जा रहा है। जिन अपराधियों का बायोमीट्रिक रिकॉर्ड तैयार हो चुका है, यदि वे किसी अन्य राज्य में भी अपराध करते हैं, तो उनकी पहचान और गिरफ्तारी में पुलिस को बड़ी आसानी होगी।