मुंबई : महाराष्ट्र की राजनीति एक ऐतिहासिक मोड़ पर है। राज्य को पहली बार महिला उपमुख्यमंत्री मिलने जा रही है। अब तक अजित पवार की मजबूती और प्रेरणा का केंद्र रहीं  सुनेत्रा पवार स्वयं शासन की मुख्यधारा में उतरने के लिए तैयार हैं। एक प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार की बहू होने के साथ-साथ उन्होंने एक सामाजिक कार्यकर्ता और उद्यमी के रूप में अपनी स्वतंत्र पहचान बनाई है।

सुनेत्रा पवार का शिक्षित होना और प्रशासनिक समझ रखना उन्हें इस उच्च पद के लिए एक योग्य उम्मीदवार बनाता है।  उन्होंने अप्रैल 1983 में डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय (BAMU) से बी.कॉम की डिग्री प्राप्त की। कॉमर्स की इस पृष्ठभूमि ने उन्हें आर्थिक प्रबंधन और वित्तीय बारीकियों में निपुण बनाया। उन्होंने औरंगाबाद के एस.बी. आर्ट्स एंड कॉमर्स कॉलेज से अपनी मास्टर डिग्री पूरी की। लेकिन इस सबसे अलग किताबी ज्ञान के अलावा, उन्होंने सामाजिक कार्यों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विशेष कोर्स भी किए हैं।

10 अक्टूबर 1963 को जन्मी सुनेत्रा के संस्कारों में देशप्रेम और समाजसेवा रची-बसी है। उनके पिता एक सम्मानित स्वतंत्रता सेनानी थे।

महज राजनीति ही नहीं, बल्कि जमीन से जुड़े कार्यों में भी सुनेत्रा की गहरी पैठ है। उन्होंने बारामती में ‘निर्मल ग्राम’ और जल प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स को सफलतापूर्वक जमीन पर उतारा। उन्हें किताबें पढ़ने का शौक है। साथ ही, वे खाली समय में नेचर फोटोग्राफी और पेंटिंग करना पसंद करती हैं।

सुनेत्रा पवार के उपमुख्यमंत्री पद तक पहुंचने से उनके लंबे समय के संस्थागत अनुभव और उच्च शिक्षा का लाभ तो महाराष्ट्र को तो मिलेगा ही, महाराष्ट्र के भविष्य में उनकी यह नई भूमिका अति महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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