लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित एक महत्वपूर्ण समागम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने हिंदू समाज की एकजुटता और देश की सुरक्षा को लेकर एक व्यापक रोडमैप पेश किया। विभिन्न पंथों और आध्यात्मिक संस्थाओं की मौजूदगी में उन्होंने सामाजिक समरसता से लेकर जनसांख्यिकीय संतुलन तक पर अपनी बेबाक राय रखी।

संघ प्रमुख ने धर्मांतरण के बाद वापस लौटने वालों के लिए समाज के नजरिए में बदलाव लाने की वकालत की। उन्होंने कहा कि जो लोग अपनी जड़ों की ओर लौटना चाहते हैं, हिंदू समाज को उन्हें बिना किसी संकोच या भेदभाव के पूरे मान-सम्मान के साथ अपनाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समाज में व्याप्त ऊंच-नीच की आदतों को अब इतिहास का हिस्सा बनाना होगा।

राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए डॉ. भागवत ने घुसपैठ के खिलाफ ट्रिपल डी के साथ एक नया फॉर्मूला दिया।

  • डिटेक्ट (Detect): अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान करना।
  • डिलीट (Delete): मतदाता सूची और अन्य आधिकारिक दस्तावेजों से उनके नाम हटाना।
  • डिपोर्ट (Deport): उन्हें देश की सीमाओं से बाहर भेजना।
  • आर्थिक बहिष्कार: उन्होंने समाज से आग्रह किया कि अवैध घुसपैठियों को किसी भी प्रकार का रोजगार न दें, ताकि वे आर्थिक रूप से टिक न सकें।

जनसांख्यिकीय संतुलन को लेकर उन्होंने हिंदू परिवारों के लिए एक विशेष सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि समाज के अस्तित्व और जीवंतता को बनाए रखने के लिए हर हिंदू परिवार में कम से कम तीन बच्चे होने चाहिए। उनके अनुसार, यह समाज की निरंतरता के लिए यह आवश्यक है।

लखनऊ की इस बैठक में सामाजिक समरसता का अनूठा उदाहरण दिखा, जहां  सिक्ख, बौद्ध, जैन समाज के साथ-साथ कई बड़ी संस्थाएं एक मंच पर आईं। इस बैठक में इस्कॉन, रामकृष्ण मिशन, आर्ट ऑफ लिविंग, जय गुरुदेव और संत निरंकारी आश्रम जैसे प्रमुख समूहों के प्रतिनिधियों ने शिरकत की। इस संगम का उद्देश्य हिंदू समाज के सभी अंगों को जोड़कर एक सशक्त और भेदभाव मुक्त राष्ट्र का निर्माण करना है।

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