
नई दिल्ली : राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान बिहार की राजनीति में एक नया विमर्श छिड़ गया है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के प्रमुख और सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने बिहार की राजधानी ‘पटना’ का नाम बदलकर पुन: ‘पाटलिपुत्र’ करने की पुरजोर मांग उठाई है। उन्होंने इसे केवल नाम का बदलाव नहीं, बल्कि बिहार के गौरवशाली अतीत की वापसी बताया।
सांसद कुशवाहा ने देश के अन्य प्रमुख शहरों के नाम परिवर्तन का उदाहरण देते हुए अपनी दलील पेश की। उन्होंने राज्यसभा में सवाल किया कि अगर बंबई का नाम बदलकर उसका प्राचीन नाम मुंबई किया जा सकता है… अगर कलकत्ता को कोलकाता और उड़ीसा को ओडिशा किया जा सकता है……तो फिर ऐतिहासिक शहर पटना को उसका गौरवमयी नाम ‘पाटलिपुत्र‘ वापस क्यों नहीं दिया जा सकता?
उपेंद्र कुशवाहा ने अपने भाषण में मौर्य साम्राज्य के स्वर्णिम काल का उल्लेख करते हुए नई पीढ़ी को प्रेरित करने की बात कही। उन्होंने कहा कि जब हम अपने पूर्वजों के योगदान को याद करते हैं, तो नई पीढ़ी को गौरव की अनुभूति होती है। मौर्य काल में बिहार का मान पूरी दुनिया में था। उस समय भारत की सीमाएं आज के बांग्लादेश, भूटान, नेपाल और अफगानिस्तान तक फैली हुई थीं। उन्होंने राष्ट्रपति के अभिभाषण का संदर्भ देते हुए कहा कि पाटलिपुत्र उसी दौर का प्रतीक है जब भारत को ‘सोने की चिड़िया’ कहा जाता था।
कुशवाहा ने तर्क दिया कि मौर्य साम्राज्य के निशान आज भी मौजूद हैं और उस ऐतिहासिक गरिमा को फिर से स्थापित करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। उनके अनुसार, नाम बदलने से राज्य की सांस्कृतिक पहचान मजबूत होगी और बिहार के प्राचीन सम्मान को नई ऊर्जा मिलेगी।
उपेंद्र कुशवाहा की इस मांग को बिहार की अस्मिता और ‘सम्राट अशोक’ की विरासत से जोड़कर देखा जा रहा है, जो आने वाले समय में राज्य की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बन सकता है।