नई दिल्ली : लोकसभा की कार्यवाही के दौरान मंगलवार को उस समय भारी हंगामा देखने को मिला, जब राहुल गांधी के भाषण और विपक्ष के व्यवहार पर सत्ता पक्ष ने कड़ा ऐतराज जताया। अनुशासनहीनता को आधार बनाकर आठ सांसदों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई है।

मंगलवार को सदन की शुरुआत से ही माहौल तनावपूर्ण था। पहले भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और बाद में राहुल गांधी के संबोधन को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच ठन गई। कार्यवाही को तीन बार स्थगित करना पड़ा और अंततः सदन दिनभर के लिए उठा दिया गया।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सदन में राहुल गांधी के वक्तव्य पर वैधानिक आपत्ति दर्ज कराई। रिजिजू ने तर्क दिया कि जिस विषय पर सदन के अध्यक्ष (स्पीकर) पहले ही अपना फैसला सुना चुके हैं, उसे दोबारा उठाना संसदीय नियमों के खिलाफ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कल के संदर्भों को आज परोक्ष रूप से उद्धृत कर सदन को गुमराह नहीं किया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष चर्चा सुनने के बजाय बाधा डालने में अधिक रुचि ले रहा है।

दूसरी ओर, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने सदन में कहा कि “मैं विपक्ष का नेता हूँ और लोकतांत्रिक रूप से मुझे अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है, लेकिन मुझे बोलने से रोका जा रहा है।”  राहुल गांधी ने निलंबन की कार्रवाई और बोलने के अवसर न मिलने को विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश करार दिया।

संसद के निचले सदन में उस समय अभूतपूर्व स्थिति पैदा हो गई जब विपक्षी सदस्यों के आक्रामक रवैये के बाद कांग्रेस और माकपा के 8 सांसदों को निलंबित कर दिया गया। हंगामे के कारण महत्वपूर्ण बिलों और बजट चर्चाओं पर असर पड़ने की संभावना है। इस निलंबन के विरोध में विपक्षी दलों ने सदन के बाहर गांधी प्रतिमा के पास प्रदर्शन करने का संकेत दिया है।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के प्रस्ताव पर नियम 374(2) के तहत निम्नलिखित सदस्यों को शेष सत्र के लिए निष्कासित किया गया:

  1. मणिकम टैगोर (कांग्रेस)
  2. अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग (कांग्रेस)
  3. गुरजीत सिंह औलजा (कांग्रेस)
  4. हिबी ईडेन (कांग्रेस)
  5. डॉ. प्रशांत यादव राव पाडोले (कांग्रेस)
  6. दीन कुरियाकोसे (कांग्रेस)
  7. किरण कुमार रेड्डी (कांग्रेस)
  8. एस. वेंकटेशन (माकपा)

किरेन रिजिजू ने प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि इन सांसदों का आचरण ‘अशोभनीय’ था। आरोप है कि सांसदों ने महासचिव और अन्य अधिकारियों की मेज तक पहुंचकर विरोध किया। सभापति की ओर कागज फाड़कर फेंके। अध्यक्ष की व्यवस्था की अवहेलना की।

हंगामे की मुख्य वजह राहुल गांधी द्वारा पूर्वी लद्दाख के मुद्दे को दोबारा उठाना रहा। राहुल गांधी नेपूर्व सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित किताब पर आधारित एक पत्रिका के लेख को सदन के पटल पर रखा और उसे सत्यापित किया। उन्होंने आरोप लगाया कि नेता प्रतिपक्ष होने के बावजूद उन्हें बोलने से रोका जा रहा है।

सरकार का तर्क था कि जिस विषय पर अध्यक्ष पहले ही व्यवस्था दे चुके हैं, उसे बार-बार उठाकर राहुल गांधी सदन का समय बर्बाद कर रहे हैं और नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं जबकि विपक्ष ने इस निलंबन को ‘लोकतंत्र की हत्या’ करार दिया है, जबकि सत्ता पक्ष इसे सदन की मर्यादा बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम बता रहा है।

राजनीतिक गलियारों में इस निलंबन की गूंज लंबे समय तक सुनाई देगी।

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