महापौर की दौर में और भी कई समाजसेवी

बोकारो :  चास नगर निगम क्षेत्र में समजसेवा के पर्याय कहे जाने वाले गोपाल मुरारका ने चुनाव की अधिसूचना जारी होते ही महापौर पद के लिए चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। इस घोषणा के बाद राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है। पिछले तीन दशकों से समाज सेवा के क्षेत्र में गोपाल मुरारका का नाम बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है।

वे पिछले 30 वर्षों से बिना किसी हंगामे के सामाजिक कार्यों में लगे हुए हैं। उनकी निःस्वार्थ सेवा को देखते हुए  कई समितियों ने समय समय पर उन्हें सम्मानित किया है। लोक सेवा समिति ने उन्हें इसी वर्ष झारखंड रत्न जैसे प्रतिष्ठित सम्मान दिया है। समाज सेवा के क्षेत्र में उन्होंने अंतिम संस्कार से लेकर आंखों की रोशनी तक के लिए अप्रतिम दान और सहयोग किये हैं। जहां वे अब तक करीब 150 शवों का अंतिम संस्कार करवा चुके हैं। इतना ही नहीं, उनके प्रयासों से मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराकर करीब 10 लोगों की आंखों की खोई हुई रोशनी वापस लौट आई है। छठ घाट से लेकर श्मशान घाट को संवारने में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही है। इन सेवाओं को देखते हुए चास की जनता का विश्वास उन पर और भी गहराया है और जनता उन्हें अपना सही मददगार समझती है। उनका लक्ष्य जात-पात और धर्म से ऊपर उठकर केवल मानव सेवा रह गया है। इन बातों को देखते हुए उनकी महापौर पद पर दावेदारी के बाद चास नगर निगम क्षेत्र में राजनीतिक हलचल तो तेज हो ही गई है कई दावेदार भी उन्हे इस पद का प्रबल दावेदार मान रहे हैं। अब जबकि चुनाव की अधिसूचना भी जारी हो गई है और आज से नामांकन भी भरे जाने हैं। 4 फरवरी ही नामांकन की अंतिम तिथि है और 6 फरवरी तक नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि सुनिश्चित की गई है। मतलब यह कि अब समय बहुत कम रह गया है। इस महापौर की दौर में कई और तथाकथित समाजसेवी भी शामिल हैं जिन्हें बहुत प्रचार की जरूरत पड़ेगी। साथ ही वादे भी करने पड़ेंगे और खुद को साबित भी करना पड़ेगा। ऐसे में किसकी दावेदारी कितनी प्रबल सिद्ध होती है, देखना दिलचस्प होगा।

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