नई दिल्ली, 17 अगस्त 2025: चुनाव आयोग ने आज एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस में बिहार की मतदाता सूची में गड़बड़ी एवं ‘वोट चोरी’ के विपक्षी आरोपों पर साफ-साफ जवाब दिया है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने आयोग की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर ज़ोर देते हुए कहा कि “चुनाव आयोग अपने संवैधानिक कर्तव्यों के प्रति प्रतिबद्ध है और सभी राजनीतिक दल हमारे लिए समान हैं।

आयोग ने कहा कि बिहार में चल रहे “विशेष गहन पुनरीक्षण” (SIR) के तहत हर योग्य वोटर को जोड़ने और अपात्र को हटाने की कवायद की गई।

इसमें 1.6 लाख बूथ-स्तरीय एजेंट (BLA) की भागीदारी रही और सभी प्रमुख दलों के BLAs ने ड्राफ्ट सूची पर हस्ताक्षर किए। नुकसान चुनाव आयुक्त ने यह भी कहा कि मतदाता पत्र शुद्धिकरण की प्रक्रिया में ब्लू के ऊपर सुपरवाइजर और उसके ऊपर एसडीएम होते हैं और उसके ऊपर के इलेक्शन कमिश्नर ।तो इसलिए मतदाता सूची में सुधार के लिए सभी का प्रतिभागी बनना आवश्यक होता है खासकर राजनीतिक पार्टियों के बारे में उन्होंने कहा कि राजनीतिक पार्टी को इसमें एक्टिवली पार्टिसिपेट करना चाहिए क्योंकि बहुत कम समय में बहुत सारा काम करना होता है मतदाता सूची शुद्धिकरण का जो भी काम होता है वह बूथ स्तर पर होता है। क्योंकि, उन्होंने कहा कि बूथ लेवल ऑफिसर्स जो होते हैं वह वहां के स्थानीय ही होते हैं ।

निर्वाचन आयोग ने बताया कि प्रक्रिया में 28,000 से अधिक दावे व आपत्ति फॉर्म प्राप्त हुए, जिनकी निष्पक्ष जांच की गई।

आयोग ने मतदाता सूची से हटाए गए 65 लाख नामों के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर डिटेल सार्वजनिक करने की भी बात कही।

मीडिया से बातचीत में CEC ने दोहराया कि “बिना ठोस प्रमाण के लगाए गए आरोप निराधार हैं, आयोग किसी पार्टी के साथ भेदभाव नहीं करता।”

CEC के मुताबिक, हर जिले के पार्टी अध्यक्ष व नामित अधिकारी की भागीदारी में प्रक्रिया चली, ऑडियो-वीडियो टेस्टिमोनियल्स के साथ रिकॉर्ड सुरक्षित रखे गए हैं। आयोग ने सभी संबंधितों से कहा है कि अगर उनके पास कोई ठोस प्रमाण हैं तो वे उसे औपचारिक रूप से जमा करें।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बिहार में ‘वोटर अधिकार यात्रा’ शुरू की है। वह आरोप लगा रहे हैं कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ की गई, जिससे लोकतंत्र खतरे में है। यह यात्रा 1 सितंबर को पटना में समाप्त होगी। इलेक्शन आयोग ने इस पर जवाब दिया कि जो भी मतदाता पत्र शुद्धिकरण का काम है उसके बारे में फीडबैक 1 सितंबर से पहले प्राप्त हो जाना चाहिए इस पर विचार किया जाएगा उसके बाद आए सुझाव पर विचार करना संभव नहीं हो पाएगा ।

ECI ने एक बार फिर अपनी निष्पक्षता, पारदर्शिता और संवैधानिक प्रतिबद्धता को दोहराया है और सभी आरोपों को सिरे से नकार दिया है। आयोग ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आगे भी ठोस कदम उठाने का भरोसा दिलाया है। एक बात बहुत जोर देकर कहा कि जो कुछ भी इलेक्शन कमीशन से शिकायत करना है, मतदाता सूची के बारे में वह हलफनामा के माध्यम से दाखिल किया जाना चाहिए क्योंकि यह एक संवैधानिक प्रक्रिया है और ऐसा नहीं करने पर इलेक्शन कमीशन इस पर विचार नहीं करेगा । आरोप लगाने के एक हफ्ते के अंदर हलफनामा दायर करना चाहिए ऐसा नहीं होने पर इलेक्शन कमीशन यह समझेगा कि यह आरोप निराधार है।

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