प्रयागराज में माघ मेला शुरू, महाशिवरात्रि को अंतिम स्नान

प्रयागराज: हिन्दू श्रद्धालुओं के लिए माघ मेला हिन्दू धर्म का एक बेहद पवित्र और प्रसिद्ध धार्मिक आयोजन है। हर साल यह आयोजन प्रयागराज में माघ महीने में होता रहा है। देश के कोने कोने ही नहीं देश-विदेश से भी श्रद्धालु त्रिवेणी संगम के किनारे लगने वाले इस मेले में शामिल होने आते हैं। ऐसी आस्था है कि  माघ महीने में संगम में स्नान करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट होते हैं और अक्षय पुण्य और आत्मिक शुद्धि प्राप्त होती है। यह भी गौर करने योग्य है कि हिंदू धर्म में स्नान-दान और पूजा पाठ का विशेष महत्व तो है ही और इसके लिए ब्रह्म मुहूर्त के समय को सर्वोत्तम माना जाता है।

पुराणों के अनुसार, माघ महीने में पवित्र संगम में स्नान करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसीलिए हर साल त्रिवेणी संगम यानी गंगा, यमुना और सरस्वती के पवित्र संगम स्थल पर ही माघ मेला आयोजित होता है, जो कि प्रयागराज में है। हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के समय अमृत की बूंदें चार स्थानों यानी हरिद्वार, उज्जैन, नासिक और प्रयागराज पर गिरी थीं। इन जगहों पर कुंभ मेला 12 साल में एक बार लगता है, लेकिन माघ मेला केवल प्रयागराज में ही हर लगता है।

माघ मेला में कई परंपराएं भी हैं, जो वर्षों से चलती आ रही है। ये परम्पराएं धार्मिक आस्था, साधना और सामाजिक श्रद्धा का प्रतीक हैं। इन परंपराओं में त्रिवेणी संगम में पवित्र स्नान करना, ध्यान, पूजा, भजन-कीर्तन, दान-दान की परंपराएं, पवित्र नदी में दीपदान करना, नागा साधु और विभिन्न अखाड़ों के दर्शन सहित साधु-सन्यासी और कल्पवासियों से मिलना भी शामिल है।

माघ मेल में कल्पवास का विशेष महत्व है। इसके लिए देश ही नहीं विदेशों से भी लोग आते हैं। हिंदू धर्म में कल्पवास एक ऐसी परंपरा है, जो कि अत्यंत कठिन है। कल्पवास में श्रद्धालु माघ मेले का पूरा महीना संगम के तट पर तप, साधना और संयम के साथ बिताते हैं। वे प्रतिदिन गंगा में स्नान करते हैं, ध्यान-पूजा करते हैं और प्रतिदिन दान करते हैं। कल्पवास के दौरान व्यतीत किये गए जीवन से मां को शांति और आध्यात्मिक उन्नति मिलती है।  

इस साल माघ मेला की शुरुआत पौष पूर्णिमा 3 जनवरी 2026 को हुई। वहीं, इसका समापन महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026 को होगा। यह मेला लगभग 45 दिनों तक पवित्र संगम तट पर लगता है। माघ मेला 2026 की प्रमुख स्नान तिथियां इस प्रकार हैं :-

पौष पूर्णिमा – 3 जनवरी, मकर संक्रांति – 14 जनवरी 2026, मौनी अमावस्या (मुख्य स्नान) – 18 जनवरी 2026, बसंत पंचमी – 23 जनवरी 2026, माघ पूर्णिमा – 1 फरवरी 2026 और अंतिम स्नान महाशिवरात्रि  – 15 फरवरी 2026 को।

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