पूर्व मंत्री ने सड़क पर दीवार खड़ी की, परिवहन किया ठप, पुलिस ने दीवार तोड़ी

इस मंत्री की संघर्ष गाथा खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही। 30 साल पुरानी फैक्ट्री के ध्वस्त होने पर एक करोड़ प्रति एकड़ मुआवजे की मांग को लेकर पूर्व मंत्री योगेंद्र साव ने रांची के केरेडारी में मुख्य सड़क पर दीवार खड़ी कर कोयला परिवहन रोक दिया। पुलिस ने उन्हें हटाकर दीवार तोड़ दी और फिर से सड़क बहाल कर दी है।

यह मामला झारखंड में भूमि अधिग्रहण और मुआवजे की बड़ी समस्या को सामने रखता है। साव 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के तहत चार गुना मुआवजे की मांग कर रहे हैं। कंपनी (एनटीपीसी और रित्विक) ने 1.97 करोड़ रुपये रांची ट्रिब्यूनल में जमा कर दिए हैं, लेकिन साव का कहना है कि यह पर्याप्त नहीं। वे और अन्य रैयत चार गुना राशि मांग रहे हैं, साथ ही पुनर्वास और प्रदूषण मुआवजे (2 रुपये प्रति टन कोयला) की भी।

योगेंद्र साव का राजनीति से पुराना नाता रहा है। मामला जब खुद पर आ जाए तो सब समझ में आने लगता है। कभी कृषि मंत्री की कुर्सी संभालने वाले योगेंद्र साव अब सड़क पर उतरकर अपनी ही सरकार से टकरा रहे हैं। योगेंद्र साव उर्फ योगेंद्र प्रसाद साव, झारखंड के पूर्व कृषि मंत्री और कांग्रेस के प्रमुख नेता हैं। उनकी पत्नी निर्मला देवी पूर्व विधायक रहीं हैं और बड़कागांव से विधानसभा चुनाव जीत चुकी हैं। उनकी बेटी अंबा प्रसाद भी पूर्व विधायक हैं, जो 2019 में बड़कागांव से चुनी गई थीं, लेकिन 2024 चुनाव में हार गईं। यानी पूरा परिवार राजनीति में रमा हुआ है।

अगर पूरे मामले को समझने की कोशिश करें तो इसमें राजनीति, कोयला खदानें, परिवार की विरासत और मुआवजे की लड़ाई सब कुछ दिखने लगेगा। इसका एक बिन्दु यह भी है कि 2016 में श्री साव एनटीपीसी की कोयला परियोजना के खिलाफ विरोध के कारण चर्चे में आए थे। उस समय प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई और पुलिस फायरिंग में चार लोग मारे गए थे। साव और उनकी पत्नी को उस मामले में दोषी ठहराया गया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई। साव हजारीबाग के केरेडारी इलाके में झुमरी टांड़ में अपनी लक्ष्मण सिरेमिक फैक्ट्री यानी फायर ब्रिक्स चला रहे थे, जो अब बहुत पुरानी बात है।

मामले में एक और पेंच चट्टी बारियातू कोल माइंस प्रोजेक्ट है। इस परियोजना के लिए बनी 2.2 किलोमीटर लंबी सड़क साव की जमीन से गुजरती है। साव का कहना है कि सड़क बिना अधिग्रहण के बनाई गई, उनकी बाउंड्री दो बार तोड़ी गई और जमीन ‘नॉन-मजूरबा खास’ है, जिसे उन्होंने शंकर शाह की बेटियों से खरीदा है, लेकिन रजिस्ट्री कोर्ट ऑर्डर से पेंडिंग है। जब तक मुआवजा नहीं, सड़क बंद।

उनका कहना है कि उनकी फैक्ट्री को 1 अगस्त 2025 को ध्वस्त कर दिया गया, जिसके बाद वे धरने पर बैठ गए। मांग: 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के तहत चार गुना मुआवजा, जो करीब एक करोड़ रुपये प्रति एकड़ बनता है। इसी मुआवजे को लेकर उनका अब अपनी ही सरकार से विरोध जारी है। यह विरोध 2004 से चली आ रही एनटीपीसी  परियोजनाओं से जुड़ा है, जहां किसानों ने कम मुआवजे पर कई बार विरोध किया।

हैप्पी न्यू ईयर की शुरुआत में साव ने विरोध को थोड़ा और टवीस्ट् दे दिया। 1 जनवरी की रात उन्होंने केरेडारी इलाके में मुख्य सड़क पर 20 फीट लंबी और पांच फीट ऊंची ईंट-मिट्टी की दीवार खड़ी कर दी। कुर्सी लगाकर खुद सड़क पर बैठ गए, जिससे एनटीपीसी  के कोयला ट्रक और ट्रेनें रुक गईं। दो दिनों तक परिवहन बाधित रहा।

2 जनवरी की सुबह 6 बजे पुलिस पहुंची। केरेडारी ओपी इंचार्ज समेत टीम ने पहले समझाने की कोशिश की, लेकिन साव नहीं माने। आखिरकार, किसी तरह उन्हें हटाया गया और दीवार को तोड़ दिया गया। कोयला परिवहन शुरू हो गया।

प्रशासन का तर्क है कि जमीन विवादित है, जंगल-झाड़ वाली, और साव के नाम रजिस्टर्ड नहीं है। इलाके में धारा 144 लगा दी गई। जबकि साव ने इसे ‘पुलिस की गुंडागर्दी’ बताया और कहा कि वे हाई कोर्ट जाएंगे। उन्होंने बीजेपी सांसद जय राम महतो पर भी आरोप लगाए कि पुलिस ‘सुपारी’ पर काम कर रही है।कंपनी का कहना है कि मुआवजा जमा हो चुका। लेकिन साव चार गुना राशि पर अड़े हैं।

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