बोकारो:  07 जनवरी को डिजिटल युग में शिक्षा, पठन संस्कृति और विद्यार्थियों के समग्र विकास को लेकर शिबू सोरेन स्मृति भवन में आयोजित शब्द सरिता महोत्सव के दौरान में एक पैनल डिस्कशन का आयोजन किया गया। जिसमें शिक्षकों, छात्रों और विद्वानों के बीच व्यावहारिक ज्ञान, पुस्तकों की उपयोगिता और ऑनलाइन शिक्षा की सीमाओं पर विस्तार से चर्चा हुई।

प्रसिद्ध विद्वान एवं लेखक प्रोफेसर विनय भारत तथा लेखक और साहित्य पुरस्कार प्राप्तकर्ता डॉ. अभय मिंज (सहायक प्रोफेसर) मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।

वक्ताओं ने कहा कि किताबें ज्ञान को गहराई देती हैं। विशेष रूप से श्रीमद् भगवद् गीता का बाल संस्करण और महान व्यक्तित्वों की जीवनियों पर आधारित पुस्तकें बच्चों और युवाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। ऐसी पुस्तकें न केवल जीवन दर्शन को समझने में सहायक होती हैं, बल्कि मनोविज्ञान, आत्मबल और मानसिक पीड़ा से उबरने में भी मदद करती हैं।

कार्यक्रम में डिजिटल युग में पढ़ने की आदत पर चिंता व्यक्त की गई। वक्ताओं ने बताया कि मोबाइल फोन और सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग से बच्चों में एकाग्रता की समस्या बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि जब हम किताब पढ़ते हैं तो किताब हमारे हाथ में होती है, लेकिन मोबाइल का अधिक उपयोग हमें नियंत्रित करने लगता है।

ऑनलाइन शिक्षा को लेकर भी सार्थक चर्चा हुई। वक्ताओं ने माना कि ऑनलाइन शिक्षा कई मामलों में सटीक और उपयोगी है, लेकिन यह विद्यार्थियों को मानवीय स्पर्श से दूर रखती है। लाइव कक्षाओं में अनेक छोटी-छोटी समस्याओं का समाधान आमने-सामने बैठकर ही बेहतर ढंग से हो पाता है।

डॉ. अभय मिंज ने अपने स्कूल के 1997 बैच के विद्यार्थी के रूप में बोकारो के अनुभव साझा करते हुए अनुशासन, नियमित अध्ययन, लिखित सारांश तैयार करने, शिक्षकों और माता-पिता के प्रति सम्मान पर जोर दिया। उन्होंने बोकारो को देश के सबसे समृद्ध शिक्षा केंद्रों में से एक बताया और कहा कि किताबें पढ़ने व स्वतंत्र चिंतन से ही एकाग्रता विकसित होती है- हर किताब एक नया रास्ता दिखाती है।

उन्होंने बच्चों को नई नोटबुक लेकर कड़ी मेहनत करने की सलाह देते हुए कहा कि किताबें हमें स्वास्थ्य के लिए नींद देती हैं, जबकि मोबाइल हमें जगाए रखता है लेकिन मेहनत कम करता है।

कार्यक्रम में यह भी रेखांकित किया गया कि लोक साहित्य का अध्ययन हमें अपनी संस्कृति और जड़ों से जोड़ता है। अंत में वक्ताओं ने विद्यार्थियों से पुस्तकों को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने और संतुलित डिजिटल उपयोग अपनाने का आह्वान किया।

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