बोकारो: 08 जनवरी 2026, शिबू सोरेन स्मृति भवन (टाउन हॉल) बोकारो में दूसरे दिन शब्द सरिता महोत्सव का शुभारंभ पारंपरिक स्वागत गीत के साथ हर्षोल्लासपूर्ण वातावरण में किया गया।
कार्यक्रम स्थल का सभागार स्कूली बच्चों से खचाखच भरा हुआ था, जिससे आयोजन की लोकप्रियता और बच्चों की साहित्यिक रुझान का स्पष्ट परिचय मिलता है।
सुबह से ही स्कूल के बच्चे, शिक्षक तथा जागरूक नागरिक महोत्सव परिसर में स्थापित पुस्तक स्टॉलों पर बड़ी संख्या में पहुंच रहे थे। विभिन्न विषयों और आयु वर्गों की पुस्तकों ने पाठकों को आकर्षित किया और लोग अपनी रुचि के अनुसार पुस्तकें चुनते नजर आए।
महोत्सव के सांस्कृतिक सत्र के अंतर्गत हॉल में स्कूली बच्चों द्वारा रंगारंग नृत्य प्रस्तुति की गई, जिसे दर्शकों द्वारा खूब सराहा जा रहा है। बच्चों की सक्रिय भागीदारी और उनकी उत्सुकता ने पूरे वातावरण को जीवंत बना दिया।
शब्द सरिता महोत्सव का एक उद्देश्य बच्चों और समाज में पठन-पाठन की संस्कृति को बढ़ावा देना तथा साहित्य से जुड़ाव को मजबूत करना था, जो स्पष्ट रूप से पूरा होता दिखा।
शब्द सरिता महोत्सव में स्कूलएसियम के संस्थापक साजिद हुसैन का गरिमामय स्वागत
शब्द सरिता महोत्सव के अवसर पर स्कूलएसियम के संस्थापक एवं निदेशक साजिद हुसैन का भव्य एवं गरिमामय स्वागत किया गया। कार्यक्रम के दौरान एसडीपीओ चास प्रवीण कुमार ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका अभिनंदन किया।
स्वागत भाषण के दौरान वक्ताओं ने कहा कि साजिद हुसैन झारखंड के पुत्र हैं तथा रामगढ़ जिले के निवासी हैं। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अनूठी पहचान स्थापित की है और नवाचार, गुणवत्ता एवं समर्पण के माध्यम से विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
वक्ताओं ने यह भी उल्लेख किया कि साजिद हुसैन का कार्य न केवल झारखंड बल्कि राज्य से बाहर भी शिक्षा जगत के लिए प्रेरणास्रोत है। उनकी सोच और प्रयासों से शिक्षा को नई दिशा मिली है।
इस अवसर पर उपस्थित शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं गणमान्य नागरिकों ने तालियों के साथ उनका स्वागत किया और उनसे प्रेरणा लेने की बात कही। कार्यक्रम का वातावरण उत्साहपूर्ण एवं प्रेरणादायी रहा।
जब मशीनें सोचने लगेंगी, तब शिक्षा कैसी होगी?”- साजिद हुसैन का विचारोत्तेजक सत्र
गुरुवार को शब्द सरिता महोत्सव के अंतर्गत स्कूलएसियम के संस्थापक एवं निदेशक साजिद हुसैन द्वारा एक अत्यंत विचारोत्तेजक सत्र प्रस्तुत किया गया। सत्र का विषय था – “जब मशीनें सोचना शुरू कर देंगी, तो हम बच्चों को कैसे शिक्षित करेंगे?” जिसने छात्रों, शिक्षकों और उपस्थित श्रोताओं को गहन चिंतन के लिए प्रेरित किया।
अपने वक्तव्य में साजिद हुसैन ने 20 वर्ष पहले, 60 वर्ष पहले और 100 वर्ष पूर्व की प्रौद्योगिकी एवं सोचने की प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हर युग में तकनीक ने मानव जीवन और शिक्षा को प्रभावित किया है। उन्होंने उपस्थित जनसमूह से आग्रह किया कि अब हम ठहरकर आने वाले अगले 20 वर्षों के बारे में गंभीरता से सोचें और स्वयं से प्रश्न करें कि भविष्य की शिक्षा कैसी होनी चाहिए।
साजिद हुसैन ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि शॉर्ट्स और त्वरित मनोरंजन के इस युग में तकनीक का विवेकपूर्ण और रचनात्मक उपयोग करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने चेताया कि यदि तकनीक का सही उपयोग नहीं किया गया, तो आने वाले समय में सरकारें और संस्थाएं मानव श्रम को रोबोटों के माध्यम से प्रतिस्थापित कर सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में लोग केवल धन कमाने के लिए नहीं, बल्कि अपनी रचनात्मकता और नवाचार के लिए कार्य करेंगे।
अपने संबोधन के दौरान उन्होंने शिक्षकों के समक्ष एक महत्वपूर्ण प्रश्न रखा – आने वाले 20 से 25 वर्षों में बच्चों को कैसे शिक्षित किया जाए? उन्होंने कहा कि शिक्षकों को अब केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रहकर बच्चों में सोचने की क्षमता, समस्या समाधान कौशल और रचनात्मक दृष्टिकोण विकसित करने पर ध्यान देना होगा।
सत्र के अंत में छात्रों और शिक्षकों के बीच संवाद हुआ, जिसमें भविष्य की शिक्षा, तकनीक और मानवीय मूल्यों के संतुलन पर सार्थक चर्चा देखने को मिली।