
रांची : प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने झारखंड के मुख्य सचिव अविनाश कुमार की पत्नी प्रीति कुमार को एक बार फिर पत्र जारी कर रांची के बरियातू रोड पर स्थित बर्लिन अस्पताल की जमीन से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज तलब किए हैं। इस पूरे विवाद की नींव बड़गाईं अंचल के पूर्व राजस्व उप निरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी है। ED की छापेमारी में भानु प्रताप के पास से सरकारी जमीनों के जो रजिस्टर और दस्तावेज मिले, उनमें इस विशिष्ट जमीन (बर्लिन अस्पताल वाली जमीन) के हेरफेर के सबूत भी शामिल थे।
जांच का मुख्य केंद्र जमीन की खरीद-बिक्री की प्रक्रिया है, जिसमें आरोप है कि जमीन (खाता 54, प्लॉट 2711) पहले डॉ. नलिनी रंजन सिन्हा और ऊषा सिन्हा के नाम पर थी। बाद में इसे मुख्य सचिव की पत्नी प्रीति कुमार और टीएम ठाकुर ने हासिल किया। ED का संदेह है कि इस डील में जमीन की वास्तविक बाजार दर को नजरअंदाज कर इसे बहुत कम कीमत पर दिखाया गया।
इस मामले की एक और गहरी जड़ जमीन की प्रकृति को बदलना है। आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर जमीन के इस्तेमाल के तरीकों में बदलाव किया गया ताकि वहां बर्लिन अस्पताल (Berlin Diagnostics and Day Care) जैसी व्यावसायिक संरचना खड़ी की जा सके।

चूंकि यह मामला ईसीआईआर (Enforcement Case Information Report) के तहत दर्ज है, ED यह भी देख रही है कि क्या इस जमीन की खरीद में अपराध की कमाई का इस्तेमाल हुआ है या इसे काले धन को सफेद करने के लिए इस्तेमाल किया गया है। यह मामला झारखंड प्रशासन के उच्च पद पर बैठे अधिकारी के परिवार से जुड़ा होने के कारण और भी चर्चे में है।
प्रीति कुमार से मांगे गए दस्तावेज दरअसल उन कड़ियों को जोड़ने के लिए हैं जो भानु प्रताप के पास मिले ‘कच्चे’ सरकारी दस्तावेजों और प्रीति कुमार के पास मौजूद ‘पक्के’ रजिस्ट्री पेपर्स के बीच के अंतर को स्पष्ट कर सकें। मनी लॉन्ड्रिंग और जमीन घोटाले की जांच में पिछले तीन साल से जुटी ईडी अब इस मामले को और गहराई से खंगाल रही है।