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नई दिल्ली : हर साल जब वित्त मंत्री संसद में बजट पेश करते हैं, तो पूरे देश की निगाहें उन पर टिकी होती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस ‘बजट’ शब्द का हम आज इतना उपयोग करते हैं, उसका इतिहास सदियों पुराना है और इसका नाता एक छोटे से चमड़े के थैले से है?

‘बजट’ शब्द की कहानी काफी दिलचस्प है। इसकी शुरुआत लैटिन भाषा के शब्द ‘बुल्गा’ (Bulga) से हुई, जिसका शाब्दिक अर्थ होता है ‘चमड़े का थैला’ या छोटा पाउच।

फ्रांसीसी सफर: लैटिन से यह शब्द फ्रांसीसी भाषा में गया, जहाँ इसे बुगेट’(Bougette) कहा जाने लगा।

अंग्रेजी बदलाव: कालांतर में यह अंग्रेजी में बोगेट'(Bogget) बना और अंततः विकसित होकर बजट’ (Budget) के रूप में हमारे सामने आया।

पुराने समय में सरकारी आय-व्यय के दस्तावेजों को चमड़े के थैलों में ही रखा जाता था, इसी कारण इस प्रक्रिया का नाम ही ‘बजट’ पड़ गया।

दुनिया में व्यवस्थित तरीके से बजट पेश करने की परंपरा की जननी इंग्लैंड को माना जाता है। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, साल 1760 में इंग्लैंड में दुनिया का पहला बजट पेश किया गया था। इंग्लैंड की सफलता के बाद फ्रांस ने 1817 में और अमेरिका ने 1921 में अपने राष्ट्रीय बजट पेश करने की औपचारिक शुरुआत की। आज यह प्रक्रिया किसी भी लोकतांत्रिक देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है।

भारत में बजट का इतिहास दो महत्वपूर्ण पड़ावों में बंटा हुआ है।

ब्रिटिश भारत (1860): 1857 की क्रांति के बाद अंग्रेजों को भारतीय अर्थव्यवस्था को व्यवस्थित करने की जरूरत महसूस हुई। इसके लिए स्कॉटिश अर्थशास्त्री जेम्स विल्सन को भारत भेजा गया। उन्होंने 7 अप्रैल, 1860 को भारत का सबसे पहला केंद्रीय बजट पेश किया।

स्वतंत्र भारत (1947): आजादी मिलने के बाद देश के पहले वित्त मंत्री आर.के. षणमुगम चेट्टी ने 26 नवंबर, 1947 को आजाद भारत का पहला बजट पेश कर एक नए युग की शुरुआत की जिस परंपरा  का निर्वहन अब तक किया जा रहा है।

मोरारजी देसाई के नाम सबसे अधिक केंद्रीय बजट पेश करने का रिकॉर्ड है, उन्होंने 10 बजट पेश किए, उसके बाद पी. चिदंबरम का स्थान है, जिन्होंने 9 बजट पेश किए। 2025 में, निर्मला सीतारमण ने प्रणब मुखर्जी के 8 बजट पेश करने के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली थी। अब निर्मला सीतारमण ने दूसरे सबसे ज्यादा बार बजट पेश करने वाले पी. चिदंबरम  जिन्होंने 9 बजट पेश किए थे, की बराबरी कर ली है। इसके बाद भी लोग इसे ऐतिहासिक बता रहे हैं क्योंकि किसी महिला वित्त मंत्री द्वारा 9 बार बजट पेश करने का रिकॉर्ड निर्मला सीतारमण के पास ही है।

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