रांची : झारखंड की सियासत में जुबानी जंग तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने दुमका में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के हालिया संबोधन पर पलटवार करते हुए उन्हें आड़े हाथों लिया है। मरांडी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि झारखंड का आदिवासी समाज अब जागरूक हो चुका है और वह किसी की राजनीतिक जागीर नहीं है।
बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया (X) के जरिए मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए तीखे तंज कसे। मरांडी ने कहा, “आदिवासी समाज को आप अपनी जागीर न समझें, जिसे जब चाहें अपनी राजनीतिक भीड़ का हिस्सा बना लें।”
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि झारखंड का आदिवासी समाज उन ‘बेबस विधायकों’ की तरह नहीं है, जिन्हें अपनी ही सरकार बचाने के लिए बसों में भरकर रायपुर भेजना पड़ा था। मरांडी ने जोर देकर कहा कि आज का आदिवासी समाज अपने स्वाभिमान, अपनी पहचान और अपने संवैधानिक अधिकारों के प्रति पूरी तरह सजग हो चुका है।
मुख्यमंत्री पर हमला जारी रखते हुए नेता प्रतिपक्ष ने उनके परिवार और आंदोलन की विरासत पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि चंद करोड़ रुपयों के लालच में आदिवासी समाज की भावनाओं और ऐतिहासिक झारखंड आंदोलन का सौदा किया गया है। मुख्यमंत्री को अपने पिता की ‘दकियानूसी सोच’ से बाहर निकलकर हकीकत को देखना चाहिए।
बाबूलाल मरांडी का यह बयान संकेत देता है कि आने वाले समय में आदिवासी वोटों और उनकी अस्मिता को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच संघर्ष और तीव्र होने वाला है।