pareeksha pe charcha- 9th edition of pareeksha pe charcha- pm news- students with pm- conversation with pm-delhi news-

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश भर के छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के साथ संवाद करते हुए परीक्षा को लेकर समाज के नजरिए को बदलने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि. परीक्षा: अंत नहीं, एक नई शुरुआत है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि परीक्षा जीवन का अंतिम पड़ाव नहीं है। अक्सर छात्र और अभिभावक इसे जीवन-मरण का प्रश्न बना लेते हैं, जो गलत है।

शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल ग्रेड शीट तैयार करना नहीं, बल्कि व्यक्ति का मानसिक, शारीरिक और नैतिक विकास होना चाहिए।  परीक्षा को एक ‘डर’ के बजाय अपनी तैयारी को परखने के एक साधन के रूप में देखा जाना चाहिए।

मणिपुर की एक छात्रा के प्रश्न का उत्तर देते हुए पीएम ने पछतावे से बाहर निकलने की कला सिखाई। उन्होंने अपने 75वें जन्मदिन का उदाहरण दिया। जब उन्हें उम्र का अहसास कराया गया। किसी ने कहा कि आपकी उम्र तो 75 की हो गई है तो उन्होंने नकारात्मक होने के बजाय सकारात्मकता चुनी कि अभी 25 वर्ष और सेवा करनी है।

 जो समय हाथ से निकल गया, उसकी चिंता में बचा हुआ समय बर्बाद करना समझदारी नहीं है। वर्तमान के हर पल का उपयोग सीखने की प्रक्रिया को आनंदमय बनाने में करना चाहिए। जो बीत गया सो बात गई।

पीएम ने आधुनिक युग में शिक्षकों की भूमिका को भी नए सिरे से परिभाषित किया। उन्होंने कहा कि सिर्फ सिलेबस पूरा कराना या छात्रों को रटाना एक अच्छे शिक्षक की पहचान नहीं है। एक आदर्श शिक्षक वही है जो छात्र की छिपी हुई प्रतिभा को पहचाने और उसे एक बेहतर इंसान बनाने की दिशा में काम करे।

अध्ययन की विभिन्न पद्धतियों पर उठने वाले सवालों पर प्रधानमंत्री ने बहुत व्यावहारिक सलाह दी। दुनिया में हर कोई आपको अलग सलाह देगा। प्रधानमंत्री के रूप में उन्हें भी कई लोग काम करने के अलग-अलग तरीके बताते हैं। दूसरों के अनुभवों और सलाह को सुनना चाहिए, लेकिन अंततः वही रास्ता चुनना चाहिए जो आपकी अपनी परिस्थितियों और प्रकृति के अनुकूल हो।

पीएम ने कहा कि दृष्टिकोण यह हो कि परीक्षा को बोझ नहीं, उत्सव की तरह मनाएं। अंकों की दौड़ के बजाय ज्ञान अर्जन पर ध्यान दें। बीते हुए कल का रोना छोड़कर, भविष्य की तैयारी करें। साथ ही अपनी मौलिकता बनाए रखें, दूसरों की नकल न करें।  

प्रधानमंत्री का यह संवाद केवल परीक्षा की तैयारी के बारे में नहीं था, बल्कि यह जीवन प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण पाठ था। उन्होंने स्पष्ट किया कि दबाव में रहकर प्रदर्शन करना कठिन है, लेकिन यदि आप सीखने की प्रक्रिया का आनंद लेते हैं, तो सफलता स्वतः आपके पास आएगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *