
बोकारो : बोकारो में बढ़ते मानव-हाथी संघर्ष को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने युद्ध स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। उपायुक्त अजय नाथ झा की अध्यक्षता में हुई बैठक में हाथियों के हमले से सुरक्षा और उनके प्राकृतिक आवास के संरक्षण को लेकर एक ठोस कार्ययोजना बनाई गई है।
इस नई रणनीति के लिए हाथी प्रभावित क्षेत्रों में ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए डीएमएफटी (DMFT) फंड का इस्तेमाल किया जाएगा। पंचायतों में रात्रि के अंधेरे को दूर करने के लिए व्यापक स्तर पर हाई मास्क और सोलर लाइटें लगाई जाएंगी। हाथियों को बस्तियों में घुसने से रोकने के लिए सौर ऊर्जा से चलने वाली बाड़ लगाई जाएगी। इसके अतिरिक्त जमीनी स्तर पर ‘ग्राम रक्षा दल’ और ‘पशु रक्षा समिति’ का गठन होगा, जिसकी हर दो महीने में समीक्षा की जाएगी।
हाथियों को बस्तियों की ओर आने से रोकने के लिए उनके प्राकृतिक व्यवहार को सुधारने पर जोर दिया गया है। हाथियों के पारंपरिक रास्तों के दोनों ओर बांस और अन्य फलदार पौधे लगाए जाएंगे ताकि उन्हें जंगल में ही भोजन मिल सके। डीसी ने NHAI को सख्त निर्देश दिए हैं कि सड़क निर्माण के दौरान हाथियों के रास्तों से छेड़छाड़ न हो। हाथियों की सुरक्षित आवाजाही के लिए ‘अंडरपास’ बनाना अनिवार्य होगा।
वनों के भीतर पारिस्थितिकी तंत्र को बिगाड़ने वालों के खिलाफ प्रशासन कड़ा रुख अपनाएगा। जंगल में शोर मचाने वाले और अवैध उत्खनन में शामिल ट्रैक्टरों को दिन में ही जब्त करने का आदेश दिया गया है। पेड़ों की कटाई करने वालों के विरुद्ध पुलिस और वन विभाग संयुक्त रूप से कड़ी कानूनी कार्रवाई करेगा।
ग्रामीणों को वनों से जोड़ने और उनकी आय बढ़ाने के लिए नई योजनाएं शुरू होंगी। जिले में मधुमक्खी पालन और महुआ प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की जाएगी। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा और वे हाथियों के साथ सह-अस्तित्व के प्रति जागरूक होंगे।
बैठक में जिला वन प्रमंडल पदाधिकारी नीतीश कुमार, अपर समाहर्ता मो. मुमताज अंसारी, वन पदाधिकारी संदीप शिंदे सहित कई वरीय अधिकारी और समिति सदस्य उपस्थित रहे।