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निजीकरण और लेबर कोड के खिलाफ बैंक कर्मियों की हुंकार

बोकारो : केंद्र सरकार की आर्थिक और श्रम नीतियों के विरोध में बैंक और बीमा क्षेत्र के कर्मचारियों ने निर्णायक जंग का ऐलान कर दिया है। 12 फरवरी 2026 को होने वाली राष्ट्रव्यापी हड़ताल से ठीक पहले, बुधवार को बोकारो की सड़कों पर कर्मचारियों का सैलाब उमड़ पड़ा।

बैंक ऑफ इंडिया के आंचलिक कार्यालय के बाहर आयोजित इस विशाल प्रदर्शन में AIBEA, AIBOA, BEFI और AIIEA जैसे बड़े संगठनों के बैनर तले सैकड़ों कर्मचारी जुटे।

 इस प्रदर्शन में महिला कर्मचारियों की बढ़ती भागीदारी ने केंद्र सरकार को स्पष्ट संदेश दिया कि यह लड़ाई अब हर घर तक पहुंच चुकी है।

 हैरानी की बात यह रही कि सीधे तौर पर हड़ताल में शामिल न होने वाले संगठनों (AIBOC और NCBA) ने भी इस आंदोलन को अपना नैतिक समर्थन दिया है, जो कर्मचारियों की ‘चट्टानी एकता’ को दर्शाता है।

कर्मचारियों की नाराजगी के केंद्र में मोदी सरकार के तीन प्रमुख फैसले हैं।  29 पुराने श्रम कानूनों को खत्म कर 4 नए ‘लेबर कोड’ लागू करने के फैसले को कर्मचारी मजदूर-विरोधी बता रहे हैं सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण और उनके विलय (Merger) की प्रक्रिया से बैंक कर्मी नाराज हैं। साथ ही बीमा क्षेत्र में 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को मंजूरी देने के खिलाफ कर्मचारी आक्रोशित हैं।

बुधवार की शाम को हुए इस ‘आक्रोश प्रदर्शन’ के बाद, आज यानी 12 फरवरी को जिले के अधिकांश बैंकों और बीमा दफ्तरों में ताले लटके रहने की संभावना है। बैंक कर्मियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो यह आंदोलन और भी उग्र होगा।

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