नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय की ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) के लीज मामले में छापेमारी ने राजनीतिक भूचाल मचा दिया है। भारतीय जनता पार्टी और तृणमूल कांग्रेस दोनों एक दूसरे पर आरोपों की झड़ी लगाए जा रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी ने आरोप लगाया है कि यह घोटाला सत्ता के संरक्षण में हुआ है और अब सच्चाई सामने आ रही है। वहीं तृणमूल कांग्रेस इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रहा है।
इस बीच प्रवर्तन निदेशालय ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल सरकार, इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी(I-PAC), जो ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस से जुड़ी एक पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म है, के हेडक्वार्टर और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के कोलकाता स्थित घर पर एजेंसियों के सर्च ऑपरेशन में दखलअंदाजी कर रही है और रुकावट डाल रही है। ED का दावा है कि पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित कोयला घोटाले (WB Coal Scam) से निकली हजारों करोड़ रुपये की अवैध नकदी का एक हिस्सा चुनावी रणनीति कंपनी इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमिटी (I-PAC) की गतिविधियों में इस्तेमाल किया गया है।
8 जनवरी को ED ने पश्चिम बंगाल और दिल्ली में एक साथ कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। यह कार्रवाई कथित अवैध कोयला खनन और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों को लेकर हुई थी। जांच एजेंसियों के अनुसार ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) के लीज क्षेत्र से बड़े पैमाने पर कोयले की चोरी की गई। इस पूरे नेटवर्क का संचालन अनूप माझी उर्फ लाला नामक व्यक्ति कर रहा था, जिसे कई सरकारी अफसरों, पुलिस और अन्य प्रभावशाली लोगों का संरक्षण प्राप्त है।
ED का कहना है कि अवैध रूप से निकाला गया कोयला विभिन्न जिलों की फैक्ट्रियों को बेचा गया, जिससे भारी मात्रा में नकद पैसा इकट्ठा हुआ। 2017 से 2020 के बीच हुए इस घोटाले से ₹2,742 करोड़ से ज्यादा के आपराधिक मामलों ने जन्म लिया है। यह पैसा ज्यादातर नकद में वसूला गया और अलग-अलग चैनलों से आगे भेजा गया। इसी रकम में से करीब ₹20 करोड़ I-PAC तक पहुंचाए गए। ED के अनुसार, यह ₹20 करोड़ कोलकाता से गोवा तक हवाला नेटवर्क के जरिए भेजे गए। आरोप यह भी है कि 2021–22 के दौरान इस रकम का इस्तेमाल चुनावी आयोजनों, इवेंट मैनेजमेंट और राजनीतिक अभियानों में किया गया।
जांच एजेंसी का दावा है कि गोवा में यह पैसा I-PAC से जुड़ी कंपनियों और लोगों के जरिए खर्च हुआ। I-PAC के सह-संस्थापक प्रतीक जैन इस मामले में जांच के दायरे में हैं जबकि अब तक इस मामले में 40 से ज्यादा लोगों को आरोपी बनाया जा चुका है। अनूप माझी को मुख्य आरोपी बनाया गया है। एक पूर्व पुलिस अधिकारी को भी गिरफ्तार किया गया है, जिस पर कोयला ट्रकों और नकदी की सुरक्षित आवागमन में मदद करने का आरोप है।
ED ने अदालत में ममता बनर्जी की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर ED के अनुसार यह सिर्फ कोयले की चोरी का मामला नहीं, बल्कि काले धन से चुनावी मशीनरी चलाने का है। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, पश्चिम बंगाल की राजनीति में और भूकंप की संभावनाएं बढ़ती जा रही है। ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) के लीज क्षेत्र से बड़े पैमाने पर कोयले की चोरी के इस मामले से किसे कितना राजनीतिक लाभ मिलेगा यह तो अलग मुद्दा है लेकिन इसने पश्चिम बंगाल सरकार की नींद जरूर हराम कर दी है।