रांची  : झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के बहुचर्चित द्वितीय घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक्शन तेज कर दिया है। केंद्रीय एजेंसी ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर घोटाले के आरोपी 28 पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की चल-अचल संपत्ति और पोस्टिंग का पूरा रिकॉर्ड मांगा है।

ईडी ने जिन 28 अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू की है, उनमें से कई अब प्रोन्नति पाकर एडीएम (ADM) और आईपीएस (IPS) रैंक तक पहुंच चुके हैं। जिन पर ईडी की आंच आई है उनमें राधा प्रेम किशोर, विनोद राम, हरिशंकर, रवि कुमार कुजूर, मुकेश कुमार महतो, कुंदन कुमार सिंह, मौसमी नागेश, कानू राम नाग, प्रकाश कुमार, संगीता कुमारी, रजनीश कुमार, शिवेंद्र, संतोष कुमार चौधरी, रोहित सिंह, शैलेश कुमार श्रीवास्तव, , अमित कुमार, राहुल जी आनंद, इंद्रजीत सिंह, शिशिर कुमार सिंह, राजीव कुमार सिंह, रामकृष्ण कुमार,  प्रमोद राम, अरविंद कुमार सिंह, विकास कुमार पांडे, मनोज कुमार, सुदामा कुमार और कुमुद कुमार शामिल हैं।

गौरतलब है कि इस घोटाले की जांच पहले सीबीआई (CBI) ने की थी, जिसमें जेपीएससी के तत्कालीन अधिकारियों और परीक्षार्थियों समेत कुल 60 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र  दाखिल किया गया था। वर्तमान में ये सभी 28 अधिकारी जमानत पर बाहर हैं। ईडी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन अधिकारियों ने सेवा काल के दौरान कितनी संपत्ति अर्जित की और क्या इसमें घोटाले की रकम का निवेश किया गया है।

सरकारी नियमों के अनुसार, हर अधिकारी को नियुक्ति के समय और प्रतिवर्ष अपनी संपत्ति का विवरण सरकार को देना अनिवार्य है। ईडी इन स्व-घोषित विवरणों का मिलान उनके वास्तविक निवेशों और आय के स्रोतों से करेगी। ईडी के इस कदम से झारखंड के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है, क्योंकि जांच की आंच अब उन पदों तक पहुंच गई है जो नीति-निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और PMLA के तहत यह जांच संभव है। इसमें नियुक्ति से लेकर वर्तमान पदस्थापना तक की आय की समीक्षा होगी और संपत्ति के ब्योरे में विसंगति पाए जाने पर ईडी पूछताछ के लिए समन भेज सकती है और संपत्तियां कुर्क की जा सकती हैं।

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