रांची : एक सर्वे के अनुसारजोवर्ष 2011 में की गई थी, झारखंड में भिखारियों की संख्या लगभग 10,819 थी। अब तो 16 साल बाद यह संख्या बढ़ कर जाने कितनी गुणी हो गई होगी। क्योंकि भीख मांगना एक मजबूरी ही नहीं दिन ब दिन एक शौक भी बनता जा रहा है। कितने ही लोगों को भीख मांगना पसंद है काम करना नहीं। क्योंकि वैसे लोगों की समझ है कि काम करने से ज्यादा भीख मांगने में पैसे आ जाते हैं और थोड़ा-सा नाटक के अलावा ज्यादा कुछ नहीं करना पड़ता है। ऐसे लोगों के पास भीख मांगने के लिए बहुत से बहाने भी होते हैं।
हालांकि भीखमंगों की बढ़ती हुई संख्या को ध्यान में रख कर केंद्र सरकार ने 2022 में एक योजना शुरू की थी SMILE यानी Support for Marginalised Individuals for Livelihood and Enterprises. इसके अंतर्गत समाज के वंचित वर्गों विशेषकर ट्रांसजेंडरों और भीख मांग कर जीवन यापन करनेवाले लोगों के कल्याण के लिए योजना बनाई जाती है। 2022 में शुरू की गई इस योजना का मुख्य उद्देश्य है कि समाज के अंतिम लोगों को मुख्यधारा में ला कर उन्हें सम्मानजनक जीवन यापन करने के काबिल बनाया जाए।

अब इतने दिन बाद ही सही झारखंड में भी इस योजना साथ ट्रांसजेंडरों और भिखारियों को जोड़कर उनके लिए जनकल्याणकारी योजनाएं लाने पर विचार किया जा रहा है। सरकार ने उन्हें योग्यता के आधार पर व्यावसायिक प्रशिक्षण देने का भी मन बनाया है। SMILE योजना के लिए पहले ट्रांसजेंडर व्यक्तियों और भिखारियों का सर्वेक्षण किया जाता है, फिर उनकी पहचान कर उन्हें सुरक्षा प्रदान की जाती है। इन लोगों को चिन्हित कर उनकी मूलभूत आवश्यकता जैसे रोटी, कपड़ा और मकान को सरकार उपलब्ध कराएगी। इस योजना में भिखारियों के लिए पुनर्वास गृह की व्यवस्था भी शामिल है।
राज्य सरकार की ओर से इस संबंध में सभी नगर निकायों को दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। नगर निकाय NGO’s को चुन कर सर्वे करने को कहेगा और सर्वे के बाद केंद्र की सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा राज्यों को अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा। यही अनुदान राज्य सरकार इन भीख मांगने वालों और ट्रांसजेंडर लोगों पर खर्च करेगी।
सरकार अपने उद्देश्य में कितना सफल हो पाती है, यह तो समय ही बताएगा। लेकिन ट्रांसजेंडरों और भीख मांगने वालों का भी विकास हो उन्हें शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण व रोजगार दिया जाए यह उद्देश्य तनिक सा भी पूरा हो जाता है तो उन्हें एक गरिमामय जीवन मिल सकेगा और भिखारियों को भी पुनर्वास शिक्षा, कौशल विकास, स्वास्थ्य सुविधा देने से शहरों से धीरे-धीरे भिक्षावृत्ति खत्म हो सकेगी।