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बोकारो:   मकर संक्रांति के अवसर पर बोकारो जिले के कसमार प्रखंड स्थित मजुरा गांव में आयोजित होने वाली अनोखी तीरंदाजी प्रतियोगिता जिसे ‘बेजा बिंधा’ कहा जाता है, एक ऐसा पारंपरिक आयोजन है जिसमें मजुरा गांव के साथ-साथ आसपास के कई गांवों के तीरंदाज भाग लेते हैं।

वैसे तो मकर सक्रांति पर पूरे झारखंड ही नहीं बल्कि देश भर में मेलों और उत्सवों का आयोजन होता है। देश भर में इन मेलों में मुर्गा लड़ाई से लेकर तरह-तरह की प्रतियोगिताएं होती हैं। मगर इस प्रतियोगिता की बात ही कुछ और है।     

इस प्रतियोगिता की सबसे खास बात यह है कि इसमें विजेता तीरंदाज को 20 डिसमिल जमीन एक वर्ष के लिए लेआज पर दिया जाता है और उस भूमि पर एक वर्ष तक खेती करने का अधिकार भी दिया जाता है।  यही वजह है कि यह प्रतियोगिता न सिर्फ खेल, बल्कि विजेता को आजीविका भी देता है। साथ ही विजेता को अलग पहचान भी मिलती है।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2025 में इस प्रतियोगिता के विजेता मजुरा गांव के लक्ष्मण तुरी रहे थे। लेकिन इस वर्ष 2026 में आयोजित बेजा बिंधा प्रतियोगिता में झरमूंगा गांव के पिंटू करमाली ने शानदार प्रदर्शन करते हुए मुकाबला जीत लिया है। उन्होंने पहले ही राउंड में सटीक निशाना साधकर प्रतियोगिता अपने नाम कर लिया। जीत के बाद पिंटू करमाली ने खुशी जाहिर करते हुए बताया कि वे इससे पहले वर्ष 2021 में भी इस प्रतियोगिता के विजेता रह चुके हैं। उन्होंने कहा कि इस बार उन्हें मिली जमीन पर वे सब्जियों की खेती करेंगे।

बेजा बिंधा प्रतियोगिता की शुरुआत करीब 100 वर्ष पहले हुई थी। इसके आयोजक विजय किशोर इसका उद्देश्य ग्रामीणों के बीच खेल भावना को बढ़ावा देना और पारंपरिक संस्कृति को सहेज कर रखना बताते हैं। वे बताते हैं कि उनके पूर्वजों ने इस प्रतियोगिता की शुरुआत की थी जिसे  वे अब तक निभाते आ रहे हैं। इसमें हर वर्ष मकर संक्रांति के दिन इस प्रतियोगिता की शुरुआत नदी में सामूहिक स्नान और पूजा-अर्चना से होती है। इसके बाद गांव के गौड़ायत (वरिष्ठ पुरोहित) द्वारा मैदान में केले के खंभे की स्थापना कर विधिवत पूजन किया जाता है।

इसके बाद सभी प्रतिभागी धनुष-बाण के साथ केले के खंभे से 101 कदम की दूरी पर खड़े होकर निशाना लगाते हैं। अंत में सफल तीरंदाज को पुरस्कार स्वरूप 20 डिसमिल जमीन दी जाती है, जिस पर वह पूरे वर्ष खेती कर सकता है।

ग्रामीण कहते हैं कि भविष्य में भी बेजा बिंधा प्रतियोगिता का आयोजन इसी तरह ओटी रहे सबकी यही इच्छा रहती है। पूरा गांव बेजा बिंधा का इंतजार पूरे साल करता है और इसे देखने में बहुत मज़ा आता  है।

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