नई दिल्ली : पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने आगामी केंद्रीय बजट को लेकर सरकार और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने बजट को दूरदर्शिता की कमी और आर्थिक वास्तविकताओं से कटा हुआ करार दिया।
चिदंबरम ने कटाक्ष करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है जैसे वित्त मंत्री ने आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 को या तो पढ़ा ही नहीं है, या उसे जानबूझकर नजरअंदाज कर दिया है। उनके अनुसार, बजट भाषण को देश की प्रमुख आर्थिक चुनौतियों का समाधान पेश करना चाहिए था, लेकिन यह केवल “राजस्व और व्यय का एक साधारण लेखा-जोखा” बनकर रह गया।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने उन महत्वपूर्ण मुद्दों की सूची साझा की, जिन पर उनके अनुसार बजट में कोई ठोस बात नहीं की गई। अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ, निजी निवेशकों की हिचकिचाहट और विदेशी निवेश (FDI) के प्रवाह में अनिश्चितता, लाखों सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों का बंद होना, शहरी क्षेत्रों में चरमराता इंफ्रास्ट्रक्चर और बढ़ता शहरीकरण और युवाओं के बीच रोजगार के अवसरों का गंभीर अभाव जैसे कुछ बिन्दु थे जिस पर सरकार ने चुप्पी साध ली।
चिदंबरम ने बजट में नई योजनाओं की घोषणा की होड़ पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि “मैंने लगभग 24 ऐसी नई घोषणाएं (योजनाएं, मिशन, कोष) गिनी हैं, जिनका जिक्र वित्त मंत्री ने किया। यह कल्पना करना मुश्किल नहीं है कि इनमें से कितनी योजनाएं अगले साल तक गायब हो जाएंगी या भुला दी जाएंगी।”
राजनीतिक मोर्चे पर बात करते हुए, चिदंबरम ने केंद्र पर तमिलनाडु के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री ने बार-बार राज्य की मांगों को खारिज किया है और इसकी वजह राज्य में भाजपा की कमजोर राजनीतिक स्थिति है।