ऐसा माना जाता है कि गुप्त नवरात्रि में मां भगवती की उपासना करने से भक्तों के सभी दुख और कष्ट दूर होते हैं। माघ गुप्त नवरात्रि देवी दुर्गा का आशीर्वाद पाने के लिए बहुत ही शुभ समय है। गुप्त नवरात्रि के नौ दिनों में 10 महाविद्याओं मां काली, तारा, त्रिपुर, सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर, भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला की गुप्त रूप से पूजा की जाती है। मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि में मां भगवती पूजा से शीघ्र प्रसन्न होती हैं और मनोवांछित फल प्रदान करती हैं। इन नौ दिनों में किए शुभ मांगलिक कार्यों का फल शीघ्र मिलता है।
नवरात्रि के नौ दिन माता दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। साल भर में चार बार नवरात्रि मनाई जाती है। पहली चैत्र नवरात्रि और दूसरी शारदीय नवरात्रि। इसके अलावा, साल में दो बार गुप्त नवरात्रि भी आती है, जो माघ और आषाढ़ के महीने में मनाई जाती है। गुप्त नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों के अतिरिक्त मां भगवती दुर्गा के 10 महाविद्याओं की भी पूजा की जाती है। वैदिक पंचांग के अनुसार, माघ गुप्त नवरात्रि माघ माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तिथि तक मनाई जाती है। इसे शिशिर नवरात्रि के नाम से भी जाना जाता है।
इस वर्ष हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ माह की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 19 जनवरी 2026, सोमवार को देर रात 01 बजकर 21 मिनट पर हो रही है। वहीं, इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 19 जनवरी को देर रात 02 बजकर 14 मिनट पर होगा। उदयातिथि के अनुसार, गुप्त नवरात्रि 19 जनवरी से शुरू होगी। इस दिन घटस्थापना और पूजा की जाएगी। वहीं, माघ गुप्त नवरात्रि का समापन 28 जनवरी 2026, बुधवार को होगा। 19 जनवरी को घटस्थापना का शुभ समय सुबह 07 बजकर 14 मिनट से लेकर सुबह 10 बजकर 46 मिनट तक है। इसके साथ ही, अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 11 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 53 मिनट रह है। ऐसे में, साधक अपनी सुविधा अनुसार समय पर घटस्थापना कर गुप्त नवरात्रि की पूजा की शुरुआत कर सकते हैं।
इस वर्ष गुप्त नवरात्रि पर शुभ संयोग इस प्रकार हैं।
19 जनवरी (प्रतिपदा तिथि) – सर्वार्थ सिद्धि योग
20 जनवरी (द्वितीया तिथि) – द्विपुष्कर योग, राजयोग
21 जनवरी (तृतीया तिथि) – रवि योग
22 जनवरी (चतुर्थी तिथि) – रवि योग
23 जनवरी (पंचमी तिथि) – कुमार योग, रवि योग
24 जनवरी (षष्ठी तिहति) – रवि योग
25 जनवरी (सप्तमी तिथि) – रवि योग, सर्वार्थ सिद्धि
26 जनवरी (अष्टमी तिथि) – साध्य और शुभ का संयोग
27 जनवरी (नवमी तिथि) – सर्वार्थ सिद्धि योग
हिन्दू पर्व में नवरात्रि और गुप्त नवरात्रि का अपना अलग महत्व है। भक्त और साधक पूरे वर्ष इसकी प्रतीक्षा करते हैं। क्योंकि इस काल में किए गए सारे मांगलिक कार्य बिना बाधा के पूरे होते हैं। मां भगवती की कृपा पाने का यह बिल्कुल सही समय है। श्रद्धा और संयम से की गई उनकी पूजा मनोवांछित फल प्रदान करती है।