रांची : भारत में सड़क हादसों की भयावह स्थिति और बढ़ते मृत्यु दर को देखते हुए झारखंड सरकार ने एक ‘विशाल एक्शन प्लान’ तैयार किया है। सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देश के बाद, राज्य के परिवहन सचिव ने सभी जिलों के उपायुक्तों और पुलिस अधीक्षकों को इस योजना को जमीन पर उतारने का आदेश दिया है।

सड़क हादसों की स्थिति देश और राज्य दोनों स्तरों पर चिंताजनक बनी हुई है। भारत में हर दिन औसतन 1300 सड़क हादसे होते हैं, जिनमें 485 लोगों की मौत हो जाती है। अकेले 2023 में 1.72 लाख से अधिक लोगों ने अपनी जान गंवाई।

सड़क हादसों के मामले में झारखंड की स्थिति यह है कि राज्य में प्रतिदिन 15 से 16 दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें औसतन 12 लोगों की मौत होती है। वर्ष 2025 में करीब 5193 हादसों में 4111 लोगों की जान गई। रिपोर्ट बताती है कि शाम 6:00 से रात 9:00 बजे के बीच सबसे अधिक (20%) हादसे होते हैं। मरने वालों में 66% लोग 18 से 45 वर्ष की आयु के होते हैं।

परिवहन विभाग ने हादसों को रोकने के लिए कई कड़े प्रावधान लागू करने का निर्देश दिया है। NCRB डेटा के अनुसार, दोपहिया वाहनों में पीछे बैठने वालों की मृत्यु दर अधिक है। इसलिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 128, 129 और 194D के तहत चालक और पीछे बैठने वाले, दोनों के लिए हेलमेट अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही, प्रतिबंधित एक्सप्रेसवे पर दोपहिया वाहनों के प्रवेश को सख्ती से रोका जाएगा।

70% मौतों की वजह ओवरस्पीडिंग है, जिस पर लगाम लगाने के लिए इंटरसेप्टर वाहनों का उपयोग बढ़ाया जाएगा। सफेद चमकीली LED लाइट, नीली लाइट और अनाधिकृत हूटर बजाने वालों पर कार्रवाई होगी। ऐसे वाहनों को जब्त कर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। सड़कों पर दौड़ रहे अनफिट वाहनों के कारण होने वाले हादसों को रोकने के लिए फिटनेस प्रमाण पत्र की प्रक्रिया को कड़ा और पारदर्शी बनाया जाएगा। किसी भी प्रकार की धांधली रोकने के लिए एक मजबूत डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम स्थापित किया जाएगा।

आंकड़े बताते हैं कि अधिकतर हादसे मानवीय भूल या नियमों की अनदेखी के कारण होते हैं। इस एक्शन प्लान के माध्यम से झारखंड सरकार का लक्ष्य सड़क सुरक्षा को केवल एक नियम नहीं, बल्कि एक ‘संस्कृति’ के रूप में स्थापित करना है ताकि राज्य के नागरिकों को अकाल मृत्यु से बचाया जा सके।

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