पटना : तेजस्वी यादव को राजद का कमांडर तो बना दिया गया है पर यह देखना दिलचस्प होगा कि वह इस गिरती हुई पार्टी को कितना संभाल पाते हैं। आरजेडी के सीटों की संख्या 2020 में 80 से गिरकर 2025 में 25 पर ठहर गई है और इस धराशायी और लड़खड़ाई हुई पार्टी की कमान उन्हें सौंप दी गई है। राजद के खराब होते प्रदर्शन के बाद उन्हें कार्यकारी अध्यक्ष पद की जिम्मेवारी मिली है। अब 36 वर्षीय तेजस्वी को स्वयं को सिद्ध करना है और परिवार और पार्टी की समस्याओं से जूझते हुए अपने पिता के फैसले पर खरा उतरना है और इस फैसले को सही साबित करना है।   

पार्टी उनके हाथ लगते ही उनके विरोधी दल के लोगों को तो मौका मिल ही गया है परिवार का कलह भी सर चढ़ कर बोलने लगा है। अब विरोधी दल के लोगों द्वारा परिवारवाद के बहाने उन पर तंज कसा जा रहा है तो उनके बड़े भाई और बहन भी उन्हें दरबारियों के हाथ की कठपुतली बता रहे हैं जबकि तेजस्वी पार्टी प्रमुख लालू प्रसाद के बाद संगठनात्मक तौर पर दूसरे सबसे शक्तिशाली पद पर हैं।

तेजस्वी अपनी पार्टी में मिली नई भूमिका के साथ बिहार विधान सभा में विपक्ष के नेता के रूप में अपना पद बरकरार रखेंगे। लालू के स्वास्थ्य कारणों से निष्क्रिय रहने के कारण पार्टी के कामकाज की बागडोर उनके हाथों में होगी। लगभग 15 साल पहले राजनीति में आने के बाद से 36 वर्षीय तेजस्वी को पहली बार कोई औपचारिक संगठनात्मक पद सौंपा गया है। अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए, विपक्ष के नेता ने स्वयं कहा कि उन पर जताए गए भरोसे से वे अभिभूत हैं। उन्होंने कहा कि मैं लगभग 15 वर्षों से राजनीति में हूं, लेकिन अब तक मैंने कोई संगठनात्मक भूमिका नहीं निभाई है। मुझे सौंपी गई इस कठिन जिम्मेदारी को मैं पूरी लगन से निभाने का प्रयास करूंगा।

लालू प्रसाद ने अपने संक्षिप्त संबोधन में पार्टी नेताओं से अपने छोटे बेटे के साथ मजबूती से खड़े रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि तेजस्वी बहुत मेहनत कर रहे हैं।

इस प्रकरण में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के अध्यक्ष लालू प्रसाद से अलग रह रहे उनके बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने रविवार को कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बन तो गए हैं उनके छोटे भाई तेजस्वी लेकिन दरबारियों के एक समूह के इशारों पर चलने वाले ‘कठपुतली’ ही साबित होंगे। राजद से निष्कासन के बाद अपना जनशक्ति जनता दल बनाने वाले तेज प्रताप ने कहा कि अब जब पार्टी राजद ने तेजस्वी यादव को जिम्मेदारी सौंप ही दी है, तो उन्हें इसे अच्छी तरह निभाना चाहिए। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व तेज प्रताप यादव जब राजद में थे तब वह खुद को भगवान कृष्ण और अपने छोटे भाई को अर्जुन बताते थे।

 तेज प्रताप की बड़ी बहन रोहिणी आचार्य ने तेजस्वी को राजद का कार्यकारी अध्यक्ष बनाये जाने पर एक पोस्ट में कहा कि यह राजद के संस्थापक अध्यक्ष (लालू प्रसाद) की ‘शानदार पारी का अंत’ है। शाहजादा को राज्याभिषेक की बधाई, जो चापलूसों और घुसपैठियों के गिरोह के हाथों की कठपुतली ही बनकर रह जाएगा। रोहिणी हाल ही के बिहार विधानसभा चुनाव में राजद की हार के लिए तेजस्वी और उनके करीबी सहयोगियों संजय यादव और रमीज को जिम्मेदार ठहराती रही हैं।

जब तेज प्रताप से रोहिणी के पोस्ट के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने जवाब दिया कि हां, वह जो कह रही हैं वह सही है। मैं राजद से संबंधित इस मामले पर और कुछ नहीं बोलूंगा क्योंकि मैं अब पार्टी में नहीं हूं।

आरजेडी के विधानसभा चुनावों में सबसे खराब प्रदर्शन के दो महीने बाद ही पार्टी का इतना बड़ा फैसला हुआ। पार्टी ने रविवार को तेजस्वी प्रसाद यादव को अपना राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया। हालांकि जैसा कि बताया जा रहा है, तेजस्वी को पदोन्नत करने का निर्णय आरजेडी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया। इस निर्णय के पूर्व ही पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और पाटलिपुत्र सांसद मीसा भारती सहित वरिष्ठ नेता वहां पहले से मौजूद थे। तेजस्वी की इस पदोन्नति और मनोनयन का प्रस्ताव लालू के विश्वसनीय सहयोगी भोला यादव ने रखा था जिसे बिना किसी आपत्ति के स्वीकार कर लिया गया।

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