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बोकारो :  उपायुक्त अजय नाथ झा ने जिले के प्रतिष्ठित निजी विद्यालयों के प्राचार्यों के साथ एक समीक्षा बैठक की। इस बैठक में शिक्षा की गुणवत्ता, पारदर्शिता और अभिभावकों के हितों की रक्षा के लिए कई क्रांतिकारी निर्देश जारी किए गए हैं। डीसी ने स्पष्ट किया कि शिक्षा को व्यापार नहीं, बल्कि सर्वांगीण विकास का माध्यम बनाना होगा।

अभिभावकों को आर्थिक राहत देने के लिए दो स्तरीय व्यवस्था लागू होगी। पहला स्कूल स्तर पर जिसमें हर निजी स्कूल को एक वेलफेयर कमेटी बनानी होगी, जिसमें प्रबंधन, शिक्षक और अभिभावक प्रतिनिधि शामिल होंगे और दूसरा जिला स्तर पर जिसमें उप विकास आयुक्त की अध्यक्षता में एक जिला वेलफेयर कमेटी बनेगी, जो विवादित मामलों और फीस माफी के आवेदनों का पारदर्शी समाधान करेगी।

अभिभावकों को किसी खास दुकान से खरीदारी के लिए मजबूर नहीं किया जा सकेगा। स्कूलों को सत्र शुरू होने से 15 दिन पहले किताबों की सूची और यूनिफॉर्म का मॉडल वेबसाइट पर अपलोड करना होगा। अभिभावक अपनी सुविधा के अनुसार बाजार में कहीं से भी ये सामग्री खरीदने के लिए स्वतंत्र होंगे।

कर्मचारियों का सम्मान और छात्रों की काउंसलिंग को लेकर भी कुछ व्यवस्थाएं दी गई। स्कूल प्रबंधन को शिक्षकों, सफाई कर्मियों और सहयोगी स्टाफ के साथ सम्मानजनक व्यवहार करने का निर्देश दिया गया है।

कक्षा 9 से 12 तक के छात्रों के लिए विशेषज्ञ काउंसलर और सफल पूर्व छात्रों के माध्यम से नियमित मार्गदर्शन सत्र आयोजित किए जाएंगे।

अब निजी स्कूलों के छात्रों को भी सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा। स्कूलों को छात्रवृत्ति पोर्टल पर निबंधन कराना अनिवार्य होगा। गुरूजी क्रेडिट कार्ड, प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं से छात्रों को जोड़ना स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी होगी।

 विद्यालय अवधि के दौरान चलने वाले कोचिंग संस्थानों पर डीईओ और डीएसई को सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया गया है। स्कूलों में नशा मुक्ति, यौन उत्पीड़न रोकथाम और मेंटल हेल्थ पर नियमित सेमिनार आयोजित होंगे। आरटीई के तहत  25% आरक्षित सीटों पर पारदर्शी नामांकन सुनिश्चित करने को कहा गया है।

उपायुक्त अजय नाथ झा ने कहा कि जिला प्रशासन का लक्ष्य एक ऐसी समावेशी शिक्षा व्यवस्था बनाना है जहां विद्यालय प्रबंधन और अभिभावक के बीच बेहतर संवाद हो। किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर प्रशासन सख्त कदम उठाएगा। उपायुक्त ने कहा कि सुरक्षित एवं संवेदनशील विद्यालय वातावरण विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए अनिवार्य है। निजी विद्यालयों के प्राचार्यों एवं शिक्षकों को जिले में संचालित सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस विद्यालयों का भ्रमण करने का सुझाव दिया गया, ताकि वे वहां की शैक्षणिक, प्रबंधन एवं अवसंरचनात्मक व्यवस्थाओं का अवलोकन कर विद्यालयों में श्रेष्ठ प्रथाओं को लागू करने – निजी विद्यालयों के तर्ज पर प्रदर्शन में सुधार का सुझाव संबंधित विद्यालयों को दें।

बैठक का मुख्य उद्देश्य निजी विद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता, पारदर्शिता, जवाबदेही एवं विद्यार्थियों के समग्र विकास को सुनिश्चित करना था। बैठक में जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) जगरनाथ लोहरा एवं अन्य संबंधित विभागों के पदाधिकारी सहित डीपीएस, चिन्मया, डीएवी, एमजीएम और श्री अयप्पा पब्लिक स्कूल सहित कई प्रमुख विद्यालयों के प्राचार्य उपस्थित रहे।

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