बोकारो: शब्द सरिता महोत्सव के अंतर्गत हिस्टोरिकल जर्नी ऑफ खोरठा लैंग्वेज विषय पर आयोजित सत्र न केवल जानकारी पूर्ण रहा, बल्कि भावनात्मक रूप से भी दर्शकों को गहराई से जोड़ने वाला सिद्ध हुआ। इस सत्र में खोरठा भाषा के इतिहास, संघर्ष और गौरव पर विस्तार से चर्चा की गई। डॉ. विनोद कुमार मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।
डॉ. विनोद कुमार ने खोरठा भाषा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, उसकी सामाजिक जड़ें और सांस्कृतिक पहचान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि खोरठा केवल एक भाषा नहीं, बल्कि पीढ़ियों की स्मृति और अस्मिता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि मेरी मातृभाषा ही मेरी पहचान है।
सत्र के दौरान उन्होंने बताया कि एक संथाली शब्दकोश का निर्माण किया गया है, जो क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। साथ ही उन्होंने युवाओं और विद्यार्थियों से कम-से-कम तीन क्षेत्रीय भाषाएं सीखने का आग्रह किया, जिससे सांस्कृतिक समझ और भाषाई समृद्धि बढ़े।