बोकारो: शब्द सरिता महोत्सव के दूसरे दिन सांस्कृतिक सत्र के अंतर्गत झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत पर आधारित एक भव्य नृत्य प्रस्तुति का आयोजन किया गया। यह प्रस्तुति रामरुद्रा की कक्षा +2 की छात्राओं द्वारा दी गई, जिसने दर्शकों का मन मोह लिया।
नृत्य प्रस्तुति के दौरान मोर झारखंड, मोर सुंदर गीत पर आधारित सामूहिक नृत्य प्रस्तुत किया गया। नृत्य की सुंदरता, आकर्षक भाव-भंगिमाओं और सुसंगठित तालमेल ने झारखंड की लोक-संस्कृति और परंपराओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।
यह सामूहिक नृत्य प्रस्तुति न केवल मनोरंजन से भरपूर रही, बल्कि उसने समारोह को एक विशिष्ट पहचान भी प्रदान की। दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ छात्राओं का उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों में अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति गर्व और जुड़ाव की भावना स्पष्ट रूप से देखने को मिली।
पुस्तक मेला बोकारो को शैक्षिक केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल : दिनेश्वर मांझी
शब्द सरिता महोत्सव के अंतर्गत आयोजित पुस्तक मेले को संबोधित करते हुए दिनेश्वर मांझी ने कहा कि इस पुस्तक मेले का मुख्य उद्देश्य बोकारो शहर को एक शैक्षिक केंद्र के रूप में विकसित करना है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के साहित्यिक आयोजन आज के छात्रों के ज्ञानवर्धन में सहायक सिद्ध होते हैं।
उन्होंने संथाली साहित्य और संस्कृति की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि वर्तमान समय में यह एक अनिवार्यता बन चुकी है। संथाली साहित्य के माध्यम से भारत की आदिवासी परंपराओं, प्रकृति से जुड़ाव और पर्यावरण संरक्षण के महत्व को प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया जा सकता है।
श्री मांझी ने कहा कि आज संथाली समुदाय का व्यक्ति देश की सेवा कर रहा है, जो समाज के लिए गर्व की बात है। उन्होंने संथाली भाषा और संस्कृति के योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह आधुनिक भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
उन्होंने जानकारी दी कि संथाली भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान प्राप्त है और यह भाषा आज नाटक, कविता, निबंध और यात्रा साहित्य के माध्यम से अपनी विशिष्ट पहचान बना रही है।
प्रौद्योगिकी के इस युग में साहित्य जीवन को नया स्वरूप देने और समाज से जुड़ने का सशक्त माध्यम है। ऐसे साहित्यिक मंच संथाली भाषा के लेखकों और प्रकाशकों को आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि साहित्य प्रेमी अपने विचार-मंथन के माध्यम से समाज में ज्ञान का दीपक बनेंगे। अंत में उन्होंने इस प्रकार के आयोजनों को भाषा, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण हेतु आवश्यक बताया।
शब्द सरिता महोत्सव में काव्य और देशभक्ति प्रस्तुतियों ने बांधा समां
शब्द सरिता महोत्सव के अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक एवं साहित्यिक सत्र में आमंत्रित गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति में विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
सांस्कृतिक सत्र के अंतर्गत रामरुद्र +2 विद्यालय के छात्र जन्मेजय कुमार ने महाभारत काल पर आधारित अपनी काव्य प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी कविता ने पौराणिक काल की घटनाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत करते हुए सभागार में विशेष प्रभाव छोड़ा।
इसके पश्चात माउंट सियॉन विद्यालय की छात्रा ने देशभक्ति गीत “ऐ मेरे वतन के लोगों” की भावपूर्ण प्रस्तुति दी, जिसने उपस्थित श्रोताओं को भावुक कर दिया और सभागार देशभक्ति के रंग में रंग गया।
कार्यक्रम में छात्रों द्वारा कविता पाठ भी प्रस्तुत किया गया। वहीं, रामरुद्र +2 विद्यालय के छात्रों द्वारा पाठ वाचन किया गया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।
इसके अतिरिक्त माउंट सियॉन विद्यालय की छात्रा द्वारा देशभक्ति गीत “ए वतन, तेरा शुक्रिया कैसे करूं” की प्रस्तुति दी गई, जिसने कार्यक्रम को भावनात्मक ऊंचाई प्रदान की।
माउंट सियॉन स्कूल के ही छात्र अशोक बावला द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति गीत “संदेशे आते हैं” ने कार्यक्रम में विशेष आकर्षण पैदा किया।
आयोजित साहित्यिक सत्र में जिला शिक्षा अधीक्षक (डीएसई) अतुल कुमार चौबे ने “बड़ी नाज़ुक है यह मंज़िल…” कविता/गीत की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। उनकी प्रस्तुति ने जीवन के संघर्ष, संवेदनशीलता और लक्ष्य के प्रति सजगता को प्रभावशाली शब्दों में प्रस्तुत किया। डीएसई की प्रस्तुति को उपस्थित श्रोताओं द्वारा खूब सराहा गया तथा सभागार तालियों से गूंज उठा।
पंचतंत्र की कहानियां आज भी प्रासंगिक
शब्द सरिता महोत्सव के अवसर पर आयोजित शैक्षिक सत्र में सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती स्मिता राउत ने विद्यार्थियों को सामाजिक, भावनात्मक और नैतिक शिक्षा के महत्व को अत्यंत सरल एवं प्रभावशाली ढ़ंग से समझाया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि पंचतंत्र की कहानियां आज भी पूरी तरह प्रासंगिक हैं और ये बच्चों के चरित्र निर्माण, नैतिक मूल्यों तथा व्यवहारिक समझ को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि हर बच्चे में कोई न कोई विशेष प्रतिभा होती है और उसे पहचान कर प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि शिक्षक और समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को केवल अकादमिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों से भी समृद्ध करें। श्रीमती स्मिता राउत के विचारों को विद्यार्थियों एवं उपस्थित श्रोताओं ने गंभीरता से सुना और सराहा। उनका संवाद छात्रों के लिए प्रेरणास्रोत सिद्ध हुआ।
शब्द सरिता महोत्सव में झारखंडी सांस्कृतिक विरासत का भव्य प्रस्तुतीकरण
शब्द सरिता महोत्सव के अंतर्गत आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में संथाली नृत्य (जागो जगाओ ग्रुप) द्वारा प्रस्तुत नृत्य-नाट्य ने कार्यक्रम की भव्यता में चार चांद लगा दिए।
विनोद कुमार एवं उनके समूह की प्रस्तुति ने दर्शकों को झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से गहराई से जोड़ दिया।
इस अवसर पर प्रस्तुत नृत्य-नाट्य झारखंड की भूमि, खेती से जुड़ाव, अपनी महान पहचान को संजोए रखने तथा नृत्य-नाट्य के माध्यम से शोषण के विरुद्ध आवाज उठाने की परंपरा को सशक्त रूप से दर्शाता है। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि “सोनार झारखंड” की संकल्पना में नृत्य की महत्वपूर्ण भूमिका है, जो समाज को ऊर्जावान एवं जागरूक बनाती है।
झारखंडी मांदर की थाप ने अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष की भावना को पुनः जीवंत कर दिया और भगवान बिरसा मुंडा के आंदोलन की आभा को मंच पर साकार कर दिया। भगवान बिरसा मुंडा के जीवन पर आधारित इस नृत्य-नाट्य ने ऐसा भावनात्मक वातावरण उत्पन्न किया कि दर्शक दीर्घा में उपस्थित लोग भावविभोर हो उठे और पूरे कार्यक्रम स्थल में देशज संस्कृति की चेतना गूंज उठी।
कार्यक्रम ने न केवल सांस्कृतिक चेतना को मजबूत किया, बल्कि नई पीढ़ी को झारखंड की ऐतिहासिक विरासत और संघर्षपूर्ण परंपराओं से जोड़ने का कार्य भी किया।