नईदिल्ली: आखिर हां न करते करते यह तय हो ही गया कि वित्त मंत्री निर्मला सीतरमन परंपरा अनुसार 1 फरवरी को ही बजट प्रस्तुत करेंगी चाहे वह दिन रविवार का ही क्यों न हो। लेकिन इस बजट को लेकर एक तरफ लोगों ने काफ़ी उम्मीदें लगा रखी हैं तो दूसरी तरफ यह भी कहा जा रहा है कि केंद्र सरकार 1 फरवरी को पेश होने वाले आगामी केंद्रीय बजट में करदाताओं को एक और बड़ा तोहफा देने की तैयारी कर रही है। पिछले बजट में नई टैक्स रिजीम के तहत 12 लाख रुपये तक की आय को टैक्स फ्री करने के ऐतिहासिक कदम के बाद, अब सरकार का ध्यान उन करदाताओं की ओर है जो अभी भी पुराने टैक्स रिजीम को प्राथमिकता देते हैं। सूत्रों के हवाले से खबर है कि इस बार के बजट में आयकर की धारा 80सी के तहत मिलने वाली छूट का दायरा बढ़ाया जा सकता है, जिससे करोड़ों मध्यम वर्गीय और वेतनभोगी परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा। वर्तमान में पुराने टैक्स रिजीम को चुनने वाले करदाताओं के लिए बेसिक टैक्स छूट की सीमा 2.5 लाख रुपये है। कयास लगाए जा रहे हैं कि सरकार इस सीमा में बढ़ोतरी कर सकती है।
इसके अलावा, निवेश पर धारा 80सी के तहत मिलने वाली 1.5 लाख रुपये की टैक्स छूट की सीमा को बढ़ा कर 2 लाख रुपये किया जा सकता है। यह मांग काफी समय से लंबित थी, क्योंकि बीमा पॉलिसी के प्रीमियम, पीएफ और बच्चों की शिक्षा पर होने वाला खर्च पिछले कुछ वर्षों में काफी बढ़ गया है। इस वृद्धि का उद्देश्य लोगों को बचत और निवेश के लिए प्रोत्साहित करना है ताकि वे भविष्य के लिए सुरक्षित पूंजी जमा कर सकें।
पुराने टैक्स रिजीम की लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण इसमें मिलने वाली विभिन्न कटौतियां हैं। धारा 80सी के तहत प्राविडेन्ट फंड, पब्लिक परोविडेंट फंड, होम लोन के मूलधन का भुगतान, जीवन बीमा प्रीमियम और बच्चों की स्कूल फीस जैसे खर्चों पर छूट मिलती है। लंबे समय से टैक्स पेयर्स यह शिकायत कर रहे थे कि सरकार का पूरा फोकस नई रिजीम की तरफ है, लेकिन अब पुराने ढांचे में बदलाव कर सरकार मिडिल क्लास की नाराजगी दूर करने की कोशिश करेगी। बजट में केवल आयकर ही नहीं, बल्कि कैपिटल गेन टैक्स को सरल बनाने की दिशा में भी बड़े कदम उठाए जा सकते हैं। वर्तमान में शेयर, म्यूचुअल फंड, सोना और प्रॉपर्टी जैसे अलग-अलग एसेट्स पर टैक्स की दरें और उनकी समय सीमा अलग-अलग है, जिससे निवेशकों में भ्रम की स्थिति बनी रहती है। टैक्स एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि निवेश को बढ़ावा देने के लिए इन सभी पर एक समान और सरल टैक्स व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। डिजिटल परिसंपत्तियों यानी क्रिप्टो करेंसी को लेकर भी इस बार स्पष्टीकरण की भारी मांग है। निवेशक उम्मीद कर रहे हैं कि डिजिटल एसेट्स और विदेशी स्रोतों से होने वाली कमाई पर सरकार स्पष्ट गाइडलाइन जारी करेगी। वर्तमान में इस क्षेत्र में टैक्स की दरें काफी ऊंची हैं और नियमों में स्पष्टता की कमी है।
अब देखना है कि 1 फरवरी को जब वित्त मंत्री निर्मला सीतरमन अपना पिटारा लेकर पहुंचती हैं तो उस पिटारे से क्या क्या निकलता है और पब्लिक कितनी राहत की सांस ले पाती है।