नई दिल्ली :  प्रवर्तन निदेशालय (ED) के साथ लंबी कानूनी खींचतान के बीच झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को देश की सर्वोच्च अदालत से बड़ी राहत मिली है। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सोरेन के खिलाफ चल रही ईडी की कार्यवाही पर रोक लगा दी। इसके साथ ही अदालत ने एजेंसी की कार्यप्रणाली पर कुछ तीखी टिप्पणियां भी की हैं।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमलया बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की खंडपीठ ने हेमंत सोरेन की याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने न केवल कार्यवाही पर स्टे लगाया, बल्कि ईडी  को नोटिस जारी कर इस मामले में जवाब भी मांगा है। हेमंत सोरेन ने अपनी याचिका में उनके खिलाफ दर्ज पूरे मामले को ही खारिज करने की मांग की है।

हेमंत सोरेन ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा तब खटखटाया जब 15 जनवरी को झारखंड हाईकोर्ट ने उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें MP-MLA कोर्ट द्वारा ईडी की शिकायत पर लिए गए संज्ञान को चुनौती दी गई थी। सोरेन ने अपनी याचिका में ईडी द्वारा बार-बार पूछताछ के लिए बुलाए जाने को “उत्पीड़न” बताया था और हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी।

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने एजेंसी के कामकाज के तरीके पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि ईडी ने शिकायतों का अंबार लगा दिया है। अपनी ऊर्जा उन शिकायतों पर केंद्रित करें जो वास्तव में महत्वपूर्ण हैं। यदि आप अपनी शक्ति का सही दिशा में उपयोग करेंगे, तो कुछ रचनात्मक परिणाम सामने आएंगे।”

न्यायमूर्ति ने आगे कहा कि जांच एजेंसी को केवल मामले दर्ज करने के बजाय “प्रभावी अभियोजन”पर ध्यान देना चाहिए, ताकि अदालती कार्यवाही का कोई सार्थक निष्कर्ष निकल सके। सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश हेमंत सोरेन के लिए एक बड़ी राजनीतिक और कानूनी जीत माना जा रहा है। कोर्ट की टिप्पणियों से यह भी संकेत मिलता है कि केंद्रीय एजेंसियों को अपनी जांच की गुणवत्ता और चयन पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।

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